रूद्रावतार के पूजनार्चन के रूद्री निर्माण
रूद्रावतार के पूजनार्चन के रूद्री निर्माण
1008 हनुमत महायज्ञ में पांच लाख आहूतियां,शिवलिंग निर्माण
आज पूर्णाहुति पंच मुखी हनुमान मंदिर में भक्तों की भारी भीड
दमोह/ भगवान रूद्र के अवतार पवन पुत्र बजरंग बली के 1008 हनुमत महायज्ञ रूपी धर्म गंगा के प्रवाह में भक्तों की डुबकी लगाना और तथा रूद्री निर्माण का दौर लगातार जारी है। ज्ञात हो कि विश्व शांति,मानव कल्याण एवं राष्ट्र की मजबूती, समद्धशाली होने के पवित्र उद्ेश्य को लेकर 1008 श्रीहनुमत महायज्ञ का आयोजन चल रहा है। उक्त महायज्ञ में वेद मंत्रों के एक साथ होते उच्चारण एवं यज्ञ मंडप से उठती ज्वालायें तथा उनसे निकलने वाले धुयें से क्षेत्र का सारा वातावरण जहां धर्ममय बना हुआ है तो वहीं दूसरी ओर प्रदूषित वायुमंडल की शुद्धिकरण का भी कार्य चल रहा है। स्थानीय सिविल वार्ड में पंच मुखी हनुमान मंदिर में जहां चल रहे श्री हनुमत महायज्ञ में हजारों श्रृद्धालु अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। ज्ञात हो कि सनातन धर्म में यज्ञ,हवन,व्रत का विशेष महत्व बतलाया गया है जिसके धार्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों प्रकार के महत्वों को भी बतलाया जाता है। प्रति दिन प्रात: निर्धारित समय से महायज्ञ में भगवान हनुमंत लाल का विधि विधान से पूजनार्चन के साथ उक्त धार्मिक कार्य प्रारंभ हो जाता है ,आज 2 फरवरी 2016 को उक्त महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी।
विद्वान विप्रों करा रहे अनुष्ठान-
उक्त 1008 श्री हनुमत महायज्ञ में यज्ञाचार्य पं.महेद्र गर्ग एवं उनके सहायक पं.आशीष कटारे के नेतृत्व में चल रहा है। जिसमें पं.रवि शास्त्री,पं.ओमप्रकाश पाठक,पं.दुर्गेश शास्त्री,पं.आशीष कृष्ण शास्त्री,पं.सुनील दुबे,पं.उमेश मिश्रा,पं.राम अवतार शास्त्री सहित बडी संख्या में विद्वान विप्र अपनी सहभागिता कर रहे हैं तो वहीं जिले भर के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रृद्धालू भाग ले रहे हैं।
सवा पंाच लाख रूद्री निर्माण,आहुतियां-
सिविल वार्ड में सिद्ध पंचमुखी हनुमान मंदिर में चल रहे तृतीय 1008 हनुमत महायज्ञ में जहां पाठ,आहुतियों देने का क्रम जारी है तो वहीं रूद्री निर्माण का क्रम भी जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक सवा पांच लाख रूद्री निर्माण के साथ इतनी ही आहूतियां यज्ञ वेदी में डाली जा चुकी हैं।
चार युग,वेद,द्वारों की स्थापना-

उक्त महायज्ञ में मंडप में स्थित तोरण के साथ ही चारों द्वारों पर सतयुग,द्वापर,त्रेता एवं कलयुग का भी पूजनार्चन किया गया है। चार द्वार बनाये गये हैं जिसमें पूर्व ऋगवेद,दक्षिण यजुर्वेद,पश्चिम सामवेद और उत्तर में अर्थवेद को बनाया गया है।
ें प्रधान शक्ति पीठ सहित देवों की स्थापना-
उक्त श्री हनुमत महायज्ञ के पवित्र धार्मिक आयोजन स्थल पर धार्मिक एवं वास्तु को दृष्टिगत रखते हुये पीठों सहित वेदों के द्वारों को बनाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधान पीठ में सर्वोतोभद्र मण्डल स्थापित किया गया है जिसमें श्रीराम दरबार विराजमान है। इनके साथ ही 57 देवताओं को यहां स्थान दिया गया है। योगिनी पीठ में महाकाली,महा सरस्वती एवं महालक्ष्मी के साथ ही 64 देवियों को स्थापित किया गया है। इसी क्रम में नैऋत्य कोण में वास्तु पीठ सहित 64,वायव्य कोण में क्षेत्रपाल सहित 49,ईशान कोण में नवग्रह पीठ के साथ 47 देवताओं को विराजमान कराया गया है।


उक्त महायज्ञ में मंडप में स्थित तोरण के साथ ही चारों द्वारों पर सतयुग,द्वापर,त्रेता एवं कलयुग का भी पूजनार्चन किया गया है। चार द्वार बनाये गये हैं जिसमें पूर्व ऋगवेद,दक्षिण यजुर्वेद,पश्चिम सामवेद और उत्तर में अर्थवेद को बनाया गया है।
ें प्रधान शक्ति पीठ सहित देवों की स्थापना-
उक्त श्री हनुमत महायज्ञ के पवित्र धार्मिक आयोजन स्थल पर धार्मिक एवं वास्तु को दृष्टिगत रखते हुये पीठों सहित वेदों के द्वारों को बनाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधान पीठ में सर्वोतोभद्र मण्डल स्थापित किया गया है जिसमें श्रीराम दरबार विराजमान है। इनके साथ ही 57 देवताओं को यहां स्थान दिया गया है। योगिनी पीठ में महाकाली,महा सरस्वती एवं महालक्ष्मी के साथ ही 64 देवियों को स्थापित किया गया है। इसी क्रम में नैऋत्य कोण में वास्तु पीठ सहित 64,वायव्य कोण में क्षेत्रपाल सहित 49,ईशान कोण में नवग्रह पीठ के साथ 47 देवताओं को विराजमान कराया गया है।
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