स्वयं सिद्धा बनो युग बदला उद्धार हेतु कोई राम नहीं आयेगा-लता वानखेडे

नारी सशक्तिकरण (समता के लिये प्रतिज्ञा )शिविर में वक्ताओं ने रखे विचार ( डा.हंसा वैष्णव ) href="https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgkY4KxbzYD15n4ROxBGhmNEKogTRMCQlGmULQuKDId65WomJ7WKyRkwASN0dfTMaWfsj64xtHLWoKwjfwzeWEP4R7FebvIFm-hnGyUtSiwz5RvtR9Scy-fDnYMZfMpOVYiv2Jhlwn_xOs/s1600/A-04.jpg" imageanchor="1" > दमोह/ 26/02/2016 -नारियों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों के साथ ही सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी देने एवं उनमें आत्म विश्वास भरने के उद्ेश्य से आयोजित नारी सशक्तिकरण जिसको समता के लिये प्रतिज्ञा नाम दिया गया था में वक्ताओं ने अपने विचारों से उपस्थित महिलाओं को अवगत कराया। स्थानीय मानस भवन में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती लता बानखेडे के मुख्यातिथ्य में आयोजित शिविर का शुभारंभ मां वीणा पाणी के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। आयोजकों द्वारा आशा सिलाकारी, पुलिस अधीक्षक तिलक ङ्क्षसह, एडीशनल एस.पी. अरङ्क्षवद दुबे, महिला बाल विकास अधिकारी चन्द्रावती गुप्ता, सहायक संचालक करूणा खरे सहित मंचासीन अतिथियों की मान वंदना पुष्प गुच्छ भेंट कर की गयी। प्रेरणादायी उद्बोधन से हुआ उर्जा का संचार- शिविर की मुख्यातिथि श्रीमती लता बानखेडे ने कहा कि हमने पदभार ग्रहण करते ही यह संकल्प लिया था कि मध्यप्रदेश में इस प्रकार के शिविरों का आयोजन करते हुये एक अभियान चलायेंगे। इन्होने कहा कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार दिये हैं लेकिन हमें जानकारी नहीं होती। इसी प्रकार घटित घटनाओं एवं उत्पीडन में अधिकारों की जानकारी के आभाव में उचित न्याय नहीं मिल पाता है। समाज में व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह,दहेज,कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिये हम सभी बहनों को स्वयं जाग्रत होना पडेगा। इन्होने कहा कि उठो स्वयं सिद्धा बनो अगर नहीं उठी तो पाषण समझ हर युग तुम्हे रौंदता रहेगा। क्योंकि युग बदल चुका है और तुम्हारे उद्धार के लिये अब कोई राम नहीं आयेगा। निर्माण और प्रलय गोद में- श्रीमती बानखेडे ने कहा कि नारी विश्व की चेतना,मुक्ति,ममता,करूणा,दया,मां है वह दुर्गा है तो चंडी भी है। उसने रक्षा,अर्थतंत्र,व्यापार,कला विज्ञान,ज्ञान,साहित्यमें उसने अपनी रचनात्मक सोच बनायी है। निर्माण और प्रलय उसकी गोद में खेलते हैं,वह प्रकृति की रचिता है तो सृष्ट्रि उसी से है। कहीं फौजी,थानेदार हैं तो कहीं गृहणी,खिलाडी,संस्कृति की पहचान हैं हम,दूर हटो अबला कहने वालो हम आधी दावेदार है हम। हम कहीं से अबला नहीं हैं ,घटने वाली घटनाओं की तह में जाना पडेगा तो सहयोगी भी बनना पडेगा। शासन प्रशासन आपके साथ है आवश्कता है आपके जागरूक होने की। श्रीमती बानखेडे ने लिंगानुपात एवं लिंग भेद के कारण,निवारण पर भी प्रकाश डाला। प्रशंसा के साथ चेताया भी- पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह ने कहा इतिहास भरा पड़ा है, नारी कभी अबला नहीं रही। महिलाएं यदि आगे बढ़ नहीं पाई तो इसके लिये जिम्मेदार उनके माता-पिता है। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा जितने सशक्त हम नहीं थे उनकी बेटियां है। महिलाएं इतनी सशक्त भी न बनें कि अपने सास ससुर को भी कुछ न समझें। पुलिस अधीक्षक ने कहा मैंने ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण किया है जागरूकता की जरूरत ग्रामीण क्षेत्र में है। यह अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में, स्कूलों में किये जाने चाहिये। इसी क्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मालती असाटी ने महिलाओं को सशक्त होने की बात कही। उन्होंने कहा महिलाएं अपनी छबि बनाकर रखती हैं, अपने काम बखूबी निभाती है। उन्होंने शहर में हुई एक घटना के अपराधियों को सामने लाने तथा जाँच कराने की बात कही। उन्होंने कहा जिले में ऐसी घटना ङ्क्षचता का विषय है। कार्यक्रम का संचालन महिला बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी शिवा खरे ने तथा आभार प्रदर्शन महिला बाल विकास अधिकारी चन्द्रावती गुप्ता ने व्यक्त किया। झलकियां- 1-चर्चित सूरा की कहानी और अपने मुंह मियां मिठ्ठू बनने वाले की रही चर्चा। 2-निर्धारित समय से घंटो बिलंब से पहुंची मुख्यातिथि श्रीमती बानखेडे। 3-आयोजन स्थल के बदलने की सही जानकारी के आभाव में भटकी महिलायें। 4-अपेक्षा से कम महिलाओं की उपस्थिति अधिकांश कुर्सियां रही खाली।

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