विश्व भारत के दरवाजे पर टेगेगा अपने घुटने-प्रहलाद पटैल
जलवायु परिवर्तन,आर्थिक विकास संगोष्ठी पर वक्ताओं ने रखे विचार
कमला नेहरू महिला महाविद्यालय में राष्ट्रीय संगोष्ठी पर चला मंथन
( डा.एल.एन.वैष्णव )
दमोह/ वह दिन दूर नहीं जब विश्व के लगभग सारे देश भारत के दरवाजे पर अपने घुटने टेगेंगे वह इसलिये होगा कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी होगा यह बात क्षेत्रीय सांसद प्रहलाद सिंह पटैल ने कही। श्री पटैल स्थानीय कमला नेहरू महिला महाविद्यालय में ''जलवायु परिवर्तन एवं आर्थिक विकासÓÓ नामक विषय पर आयोजित संगोष्ठी में अपने विचार रख रहे थे। इन्होने कहा कि प्राप्त आंकडों के आधार पर विश्व में मात्र चार प्रतिशत ही पीने का पानी है जिसमें से सर्वाधिक भारत के पास है अगर इस दिशा में सही ढंग से कार्य किया जायेगा तो यह सब संभव है। श्री पटैल ने अपने सार गर्भित उद्बोधन के दौरान अनेक प्रश्रों को सबके बीच में रखते हुये सबको चिंतन मनन करने को मजबूर कर दिया। पूरी प्रमाणिकता से अपनी बात रखते श्री पटैल ने कहा कि हम सबको चिंतन करने की आवश्यकता है कि हम क्या कर रहे हैं और क्या करना चाहिये। इन्होने कहा कि जो प्रकृति के साथ जीते हैं वह स्वस्थ रहते हैं जो इसके विपरीत असाध्य बीमारियों से ग्रसित होते हैं। श्री पटैल ने कहा भारतीय संस्कृति में विश्व की सभी समस्याओं का समाधान छिपा हुआ है परन्तु जब हम कभी इस प्रकार की बात करते थे तो सारे विश्व के लोग हमारा मजाक उडाया करते थे परन्तु अब सब इसी को सही मानने के लिये मजबूर होने लगे हैं। बात मनु स्मृति की करें या फिर हमारे ऋषियों की तो उन्होने प्रत्येक समस्या का कारण और समाधान हमें लिखकर दे दिया है। हमारे वर्तमान के वैज्ञानिक मात्र 16 हजार पौधों को लिख पाये हैं जबकि चरक ने तो 64 हजार पौधों का उल्लेख कर दिया था। मनुष्य अपनी मर्यादाओं को तोड रहा है और जिसके चलते संकट खडे हो रहे हैं हम लगातार परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इन्होने नर्मदा नदी के घटते जल स्तर का कारण,समाधान दोनो को विस्तार से रखा। श्री पटैल ने अफ्रिका के जंगलों एवं 22 हजार हाथियों के कत्लेआम की चर्चा और कारण को भी रखा तो देशी गाय के महत्व को बतलाते हुये कहा कि दूध के लिये नहीं अपितु उसके गोबर,मूत्र के साथ ही उसके नथुनों से सर्वाधिक आक्सीजन निकलती है जिसके कारण देशी गाय का अधिक महत्व बतलाया गया है। आफ्रिका के सूखते जंगलों को हरा भरा बनाने में देशी भारतीय गायों का ही योगदान है। इस अवसर पर इन्होने हिमालय के खिसकने संबधि पूछे गये लोकसभा में प्रश्न का भी उल्लेख करते हुये कहा कि जो उत्तर प्राप्त हुआ है उसके चलते जो प्राकृतिक आपदायें उत्तर एवं दक्षिण क्षेत्र में आयी वह तो आनी ही थी। श्री पटैल ने लगातार उपस्थितों को चिंतन करने मजबूर किया एवं पूरी प्रमाणिकता के साथ अपनी बात को रखा।
एक छात्र भी बने सांसद-
उक्त विषय पर आयोजित गोष्ठी के दौरान वह अवसर भी देखने को मिला जब देश के अनेक विचारक,चिंतक तथा विषय विशेषज्ञ अपनी बात रख रहे थे तो एक छात्र की भांति क्षेत्रीय सांसद श्री पटैल ने विषय को समझा और देखा।
आराधना,स्वागत के साथ शुभारंभ-
उक्त विषय को लेकर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का शुभारंभ मां वीणापाणी के समक्ष दीप प्रज्जवलन के साथ मंचासीन अतिथि सांसद प्रहलाद पटैल,प्रो.केवल चंद जैन केन्द्रीय विश्वविद्यालय सागर,डा.लोकन्द्र ठक्कर महाप्रबंधक पर्यावरण विभाग भोपाल,डा.अरूण श्रीवास्तव जेएनयू दिल्ली सहित मंचासीन अतिथियों ने किया। इसी क्रम में श्रीमती शोभा भेलसेवाले के नेतृत्व में छात्राओं ने सरस्वती वंदना एवं गीत प्रस्तुत किया। कमला नेहरू महिला महाविद्यालय के प्राचार्य डा.के.पी.अहिरवार सहित स्टाफ ने मंचासीन अतिथियों का पुष्प गुच्छ एवं बेच लगाकर स्वागत किया। जबकि स्वागत भाषण डा.एन.पी.नायक ने एवं शोध संगोष्ठी की प्रस्तावना डा.डीके नेमा रखी। प्रतिवेदक डा.केशव तेकाम,डा.रश्मि गोयल,डा.एनआर सुमन रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन तुलसीराम दहायत ने किया।


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