कर लो दूनिया मुठ्ठी से कोसों दूर ग्राम वासी

बीएसएनएल अधिकारियों की मिली भगत से ग्रामीण परेशान निजि कंपनियों की बल्ले-बल्ले,भारत सरकार को चूना ( डा.एल.एन.वैष्णव )

दमोह/09/02/2016 इसे नागरिकों का दुर्भाग्य और संबधित विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही नहीं तो क्या कहेंगे कि आज भी चाह कर भी लोग भारत सरकार की सेवाओं का लाभ चाह कर भी नहीं ले पा रहे हैं? हम बात कर रहे हैं इस समय बीएसएनएल की सेवाओं की जिसकी लचर व्यवस्था के चलते आज भी लोग परेशान देखे जा सकते हैं। विभाग के आला अधिकारियों की अनदेखी तथा शासकीय योजनाओं में पलीता लगाने का इससे बडा उदाहरण क्या हो सकता है कि दर्जनों ग्रामीणों को टावर होने के बाद भी उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है? हम इस समय जिले के ही जबेरा विधान सभा क्षेत्र के ग्राम सिंगपुर में लगे बीएसएनएल टावर की बात कर रहे हैं जिसको खडे हुये लगभग तीन-चार बर्ष होने की बात ग्रामीण बतलाते हैं। परन्तु इसको न तो प्रारंभ किया गया न ही इसमें मशीनों को फिट किया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार किसी साहू परिवार की निजि जमीन में इसको लगाया गया है जिसमें एक निजि विद्यालय भी संचालित होता है। करलो दूनिया मुठी में वंचित- उक्त टावर को लगे तीन चार बर्ष व्यतीत हो चुके हैं तथा आज भारत सरकार की बीएसएनएल की करलो दूनिया मुठ्ठी स्लोगन मजाक बना कम से कम यहां तो देखा ही जा सकता है? विदित हो कि हर योजना का प्रचार-प्रसार एवं जानकारी आदान -प्रदान के लिये भारत सरकार हो या प्रदेश सरकार मोबाईल इंटरनेट का प्रयोग करने पर जोर दे रही है। एैसी स्थिति में ग्रामीण को लाभ कितना मिल पा रहा होगा यह तो आप स्वयं अंदाजा लगा ही सकते हैं? जनप्रतिनिधियों के पत्र हवा में- प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस संबध में अपने लेटरपेड पर ग्रामीणों की समस्या तथा समाधान करने के संबध में बीएसएनएल के जिला अधिकारी को लिखा था जिसका अभी तक कोई जबाब न देना किसी न किसी गोल माल की ओर ईशारा तो करता ही है? विदित हो कि जिला अभियंता की शासकीय सेवा यहीं से प्रारंभ हुई एवं यहीं इसी जिले में वह उक्त पद पर सेवायें दे रहे हैं जबकि यह निवासी भी यहीं के बतलाया जाते हैं? निजि कंपनियों को सहयोग- उक्त टावर के प्रारंभ न करने के पीछे निजि कंपनियों का लाभांवित करने के आरोप खुलकर ग्रामीण लगाते हैं? वह कहते हैं कि हेमें मजबूरी में दूसरी मोबाईल कंपनियों के सिम खरीदने पड रहे हैं। ----------------------०००००००००००००------------------

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