प्रगतिशील लखपति किसान बने राजेश पटैल दो माह में डेढ़ लाख की बेची मैंथी
दमोह : 28 फरवरी 2016

कहने को तो राजेश पटैल 6 वीं पास है, मगर आधुनिक खेती के मामले में यह किसी से कम नहीं हैं, आज उद्यानिकी के क्षेत्र में इन्होंने अपना नाम रोशन किया है, दूर दराज के किसान भी इनकी फसलों को देखने आते हैं और एक नया तर्जुवा इनसे लेकर जाते हैं। सरकार की मदद के साथ स्वयं की मेहनत रंग लाई और राजेश लाखों रूपये की फसल बेचकर एक प्रगतिशील लखपती किसान बन गये।
शहर के समीप लोको में रहने वाले राजेश पटैल कहते हैं मैने बारिस के मौसम में मैथी की पैदावार की और 100 रूपये किलो के भाव से मार्केट में बेच दी। दो माह में करीब डेढ़ लाख रूपये कमाये। ये बताते हैं पहले की अपेक्षा अब परेशानी दूर हो गई है। इन्होंने दो वर्ष पहले उद्यानिकी विभाग की योजना का लाभ उठाया और 50 प्रतिशत अनुदान पर दो पॉली हाऊस का निर्माण कराया। अब इस साल में इन्होंने नेटशेड भी बनवा लिया है।
इन्होंने एक हजार वर्ग मीटर के पॉली हाऊस में पीली क्वालिटी की शिमला मिर्च का लगाई है, यह मिर्च अब मार्केट में बिकना शुरू हो गई है। पॉली हाऊस में 2600 पौधे एक फुट की दूरी पर लगाये हैं। फसल भी 3 माह की हो गई। यह फसल एक साल तक राजेश को रूपये दिलायेगी। दूसरे पॉली हाऊस में टमाटर फसल लगी हुई है जिसका 20 दिन में उत्पादन शुरू हो जायेगा। पत्ता गोभी प्रयोग के तौर पर भी इन्होंने लगाया है।
जब इनसे पॉली हाऊस और नेट शेड से होने वाले फायदे के संबंध में पूंछा गया तो इन्होंने बताया। पॉली हाऊस और नेट शेड में फसलें ज्यादा सुरक्षित रहती हैं। ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करते है जिससे पानी भी कम लगता है। फसलें वातानुकुलित वातावरण में होने से पैदावार भी अधिक होती है। ओला-पाला, कीट, पतंगा से फसलें सुरक्षित रहती है, पौधों में किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती।
राजेश बड़े खुश है कि उद्यानिकी विभाग ने उन्हें फसलों के बारे में समय-समय पर आधुनिक तकनीक के साथ किस समय पर कौन सी फसल लेना है इसके लिये प्रोत्साहित भी किया। वे सरकार को धन्यवाद देते हैं कि उद्यानिकी योजनाओं ने उनकी जिंदगी बदल दी है।


कहने को तो राजेश पटैल 6 वीं पास है, मगर आधुनिक खेती के मामले में यह किसी से कम नहीं हैं, आज उद्यानिकी के क्षेत्र में इन्होंने अपना नाम रोशन किया है, दूर दराज के किसान भी इनकी फसलों को देखने आते हैं और एक नया तर्जुवा इनसे लेकर जाते हैं। सरकार की मदद के साथ स्वयं की मेहनत रंग लाई और राजेश लाखों रूपये की फसल बेचकर एक प्रगतिशील लखपती किसान बन गये।
शहर के समीप लोको में रहने वाले राजेश पटैल कहते हैं मैने बारिस के मौसम में मैथी की पैदावार की और 100 रूपये किलो के भाव से मार्केट में बेच दी। दो माह में करीब डेढ़ लाख रूपये कमाये। ये बताते हैं पहले की अपेक्षा अब परेशानी दूर हो गई है। इन्होंने दो वर्ष पहले उद्यानिकी विभाग की योजना का लाभ उठाया और 50 प्रतिशत अनुदान पर दो पॉली हाऊस का निर्माण कराया। अब इस साल में इन्होंने नेटशेड भी बनवा लिया है।
इन्होंने एक हजार वर्ग मीटर के पॉली हाऊस में पीली क्वालिटी की शिमला मिर्च का लगाई है, यह मिर्च अब मार्केट में बिकना शुरू हो गई है। पॉली हाऊस में 2600 पौधे एक फुट की दूरी पर लगाये हैं। फसल भी 3 माह की हो गई। यह फसल एक साल तक राजेश को रूपये दिलायेगी। दूसरे पॉली हाऊस में टमाटर फसल लगी हुई है जिसका 20 दिन में उत्पादन शुरू हो जायेगा। पत्ता गोभी प्रयोग के तौर पर भी इन्होंने लगाया है।
जब इनसे पॉली हाऊस और नेट शेड से होने वाले फायदे के संबंध में पूंछा गया तो इन्होंने बताया। पॉली हाऊस और नेट शेड में फसलें ज्यादा सुरक्षित रहती हैं। ड्रिप सिस्टम से सिंचाई करते है जिससे पानी भी कम लगता है। फसलें वातानुकुलित वातावरण में होने से पैदावार भी अधिक होती है। ओला-पाला, कीट, पतंगा से फसलें सुरक्षित रहती है, पौधों में किसी प्रकार की बीमारी नहीं होती।
राजेश बड़े खुश है कि उद्यानिकी विभाग ने उन्हें फसलों के बारे में समय-समय पर आधुनिक तकनीक के साथ किस समय पर कौन सी फसल लेना है इसके लिये प्रोत्साहित भी किया। वे सरकार को धन्यवाद देते हैं कि उद्यानिकी योजनाओं ने उनकी जिंदगी बदल दी है।
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