बुंदेली दमोह महोत्सव का भव्य होगा स्वरूप
प्रेस वार्ता में आयोजकों ने दी जानकारी ,दिये प्रश्नों के उत्तर
( डा.एल.एन.वैष्णव )

दमोह/15/02/2016 बुंदेली महोत्सव के शुभारंभ के पूर्व आयोजन स्थल पर ही स्थानीय पत्रकारों के समक्ष आयोजकों द्वारा जहां अपनी योजना एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी तो वहीं दूसरी ओर पत्रकारों के प्रश्रों के उत्तर भी दिये। ज्ञात हो कि बुंदेली दमोह महोत्सव का यह चौथा बर्ष है जो कि 15 से 24 फरवरी के मध्य आयोजित किया गया है। तहसील ग्राउंड के विशाल प्रांगण में होने वाले उक्त आयोजन में विभिन्न ख्याति प्राप्त कलाकारों की उपस्थिति तथा प्रस्तुतियां होने वाली हैं। प्रात: निर्धारित समय से लेकर देर रात्रि तक विभिन्न चरणों में अलग-अलग कार्यक्रमों को इसमें सम्पन्न कराये जाने की जानकारी दी गयी है। वहीं आयोजन स्थल पर देश के विभिन्न प्रांतों से दुकाने लगाने के लिये भी लोग आये हुये हैं। आयोजकों द्वारा विस्तृत जानकारी पत्रकारों को आयोजन को लेकर दी। इस अवसर पर न्यास के अध्यक्ष अंबालाल पटेल,सचिव प्रभात सेठ,नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी,कैलाश शैलार,महेन्द्र दुबे,राकी सुरेका उपस्थित थे जिन्होने भी अपनी बात तथा प्रश्रों के उत्तर दिये।
प्रश्र और उत्तर-
आयोजकों से जब पूंछा गया कि जब बच्चों की परीक्षायें सिर पर हैं तो एैसे समय मेले का आयोजन कहां तक उचित है तो जबाब में कहा गया कि परीक्षाओं का ध्यान रखते हुये मेले का आयोजन किया गया है। हाईटेक साउंड सिस्टम लगाया गया है जो कि प्रांगण से बाहर आवाज को नहीं जाने देगा। साथ कहा गया कि देश में विभिन्न जगहों पर मेले चलते हैं तो हमें दुकाने नहीं मिलती। दमोह के दुकानदार आना नहीं चाहते जबकि हम विशेष सुविधा देने का प्रयास करते हैं। ज्ञात हो कि प्रदेश में सिंहस्थ के आयोजन होने के कारण मध्यप्रदेश सरकार ने परीक्षायें लगभग एक माह पूर्व सम्पन्न कराने का निर्णय लिया हुआ है।
एक प्रश्र के उत्तर में सचिव प्रभात सेठ ने बतलाया कि 275 दुकाने यहां बनायी गयी हैं 33 केमरों से पूरे मेले प्रांगण की निगरानी होगी। मेले का पांच करोड का बीमा भी कराया हुआ है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा गार्ड एवं पुलिस तैनात रहेंगे।
बुंदेली अकेले नहीं रहते यहां-
आयोजकों से जब पूंछा गया कि बुंदेली दमोह महोत्सव में बुंदेली क्या खास होने जा रहा है तो उत्तर में कहा गया कि दमोह में अकेले बुंदेली नहीं रहते हैं। यहां सभी वर्ग एवं संस्कृति,धर्म के लोग निवास करते हैं इसलिये सभी संस्कृतियोंं का मिला जुला स्वरूप है? न्यास में भी सभी मजहब,संस्कृति के लोग हैं। इसलिये बुंदेली दमोह महोत्सव को राष्ट्रीय मेले का स्वरूप दिया गया है।
उपजते प्रश्र-
ृ1- तो फिर बर्षों से आयोजित होने वाले जिले के हटा नगर एवं छतरपुर में बुंदेली मेले वाले क्षेत्र में विभिन्न मजहब और संस्कृति के लोग निवास नहीं करते? क्या उनके आयोजक मंडल की टीम में सिर्फ बुंंदेली ही हैं अन्य नहीं?
2-सुविधाओं देने के बाद भी स्थानीय दुकानदार क्यों नहीं आना चाहते?
3- परीक्षाओं के नजदीक होने के बाद भी लगातार जिला प्रशासन का दमोह जिले में मेलों की अनुमति प्रदान करना क्या प्रदेश शासन के आदेशों की अवहेलना तथा देश के भविष्य बच्चों के जीवन से खिलवाड नहीं किया जा रहा है?
4- अगर संस्कृतियों का आदान प्रदान ही मेले का उद्ेश्य है तो फिर बुंदेली दमोह महोत्सव एवं बुंदेली गौरव न्यास क्यों?

दमोह/15/02/2016 बुंदेली महोत्सव के शुभारंभ के पूर्व आयोजन स्थल पर ही स्थानीय पत्रकारों के समक्ष आयोजकों द्वारा जहां अपनी योजना एवं कार्यक्रमों की जानकारी दी तो वहीं दूसरी ओर पत्रकारों के प्रश्रों के उत्तर भी दिये। ज्ञात हो कि बुंदेली दमोह महोत्सव का यह चौथा बर्ष है जो कि 15 से 24 फरवरी के मध्य आयोजित किया गया है। तहसील ग्राउंड के विशाल प्रांगण में होने वाले उक्त आयोजन में विभिन्न ख्याति प्राप्त कलाकारों की उपस्थिति तथा प्रस्तुतियां होने वाली हैं। प्रात: निर्धारित समय से लेकर देर रात्रि तक विभिन्न चरणों में अलग-अलग कार्यक्रमों को इसमें सम्पन्न कराये जाने की जानकारी दी गयी है। वहीं आयोजन स्थल पर देश के विभिन्न प्रांतों से दुकाने लगाने के लिये भी लोग आये हुये हैं। आयोजकों द्वारा विस्तृत जानकारी पत्रकारों को आयोजन को लेकर दी। इस अवसर पर न्यास के अध्यक्ष अंबालाल पटेल,सचिव प्रभात सेठ,नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी,कैलाश शैलार,महेन्द्र दुबे,राकी सुरेका उपस्थित थे जिन्होने भी अपनी बात तथा प्रश्रों के उत्तर दिये।
प्रश्र और उत्तर-
आयोजकों से जब पूंछा गया कि जब बच्चों की परीक्षायें सिर पर हैं तो एैसे समय मेले का आयोजन कहां तक उचित है तो जबाब में कहा गया कि परीक्षाओं का ध्यान रखते हुये मेले का आयोजन किया गया है। हाईटेक साउंड सिस्टम लगाया गया है जो कि प्रांगण से बाहर आवाज को नहीं जाने देगा। साथ कहा गया कि देश में विभिन्न जगहों पर मेले चलते हैं तो हमें दुकाने नहीं मिलती। दमोह के दुकानदार आना नहीं चाहते जबकि हम विशेष सुविधा देने का प्रयास करते हैं। ज्ञात हो कि प्रदेश में सिंहस्थ के आयोजन होने के कारण मध्यप्रदेश सरकार ने परीक्षायें लगभग एक माह पूर्व सम्पन्न कराने का निर्णय लिया हुआ है।
एक प्रश्र के उत्तर में सचिव प्रभात सेठ ने बतलाया कि 275 दुकाने यहां बनायी गयी हैं 33 केमरों से पूरे मेले प्रांगण की निगरानी होगी। मेले का पांच करोड का बीमा भी कराया हुआ है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा गार्ड एवं पुलिस तैनात रहेंगे।
बुंदेली अकेले नहीं रहते यहां-
आयोजकों से जब पूंछा गया कि बुंदेली दमोह महोत्सव में बुंदेली क्या खास होने जा रहा है तो उत्तर में कहा गया कि दमोह में अकेले बुंदेली नहीं रहते हैं। यहां सभी वर्ग एवं संस्कृति,धर्म के लोग निवास करते हैं इसलिये सभी संस्कृतियोंं का मिला जुला स्वरूप है? न्यास में भी सभी मजहब,संस्कृति के लोग हैं। इसलिये बुंदेली दमोह महोत्सव को राष्ट्रीय मेले का स्वरूप दिया गया है।
उपजते प्रश्र-
ृ1- तो फिर बर्षों से आयोजित होने वाले जिले के हटा नगर एवं छतरपुर में बुंदेली मेले वाले क्षेत्र में विभिन्न मजहब और संस्कृति के लोग निवास नहीं करते? क्या उनके आयोजक मंडल की टीम में सिर्फ बुंंदेली ही हैं अन्य नहीं?
2-सुविधाओं देने के बाद भी स्थानीय दुकानदार क्यों नहीं आना चाहते?
3- परीक्षाओं के नजदीक होने के बाद भी लगातार जिला प्रशासन का दमोह जिले में मेलों की अनुमति प्रदान करना क्या प्रदेश शासन के आदेशों की अवहेलना तथा देश के भविष्य बच्चों के जीवन से खिलवाड नहीं किया जा रहा है?
4- अगर संस्कृतियों का आदान प्रदान ही मेले का उद्ेश्य है तो फिर बुंदेली दमोह महोत्सव एवं बुंदेली गौरव न्यास क्यों?
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