1008 हनुमत महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन
1008 हनुमत महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन
रूद्रावतार पूजन के साथ रूद्री निर्माण कर भक्तों ने लिया धर्मलाभ
दमोह/ विश्व शांति,राष्ट्र समृद्धशाली हो तथा मानवों के साथ प्राणियों के कल्याण एवं पर्यावरण का बना रहे एैसी पवित्र मनोकामनाओं को लेकर आज 1008 हनुमत महायज्ञ का समापन पूर्णाहुति के साथ हो गया। विदित हो कि भगवान रूद्र के अवतार पवन पुत्र बजरंग बली के 1008 हनुमत महायज्ञ रूपी धर्म गंगा के प्रवाह में भक्तों ने लगातार डुबकी लगायी और धर्म लाभ अर्जित किया। प्रतिदिन उक्त महायज्ञ में वेद मंत्रों के एक साथ होते उच्चारण एवं यज्ञ मंडप से उठती ज्वालायें तथा उनसे निकलने वाले धुयें से क्षेत्र का सारा वातावरण जहां धर्ममय बना रहा तो वहीं दूसरी ओर प्रदूषित वायुमंडल की शुद्धिकरण का भी कार्य चलता रहा । स्थानीय सिविल वार्ड में पंच मुखी हनुमान मंदिर में जहां चल रहे श्री हनुमत महायज्ञ में हजारों श्रृद्धालु अपनी सहभागिता की। विदित हो कि सनातन धर्म में यज्ञ,हवन,व्रत का विशेष महत्व बतलाया गया है जिसके धार्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों प्रकार के महत्वों को भी बतलाया जाता है।
पूर्णाहुति के साथ भगवान से आशीष-
हजारों की संख्या में श्रृद्धालुओं ने उक्त महायज्ञ में लगातार उपस्थिति दर्ज कराते हुये पूर्णाहुति में सहभागिता करते हुये श्रीराम भक्त हनुमान से आशीष मांगा। तो वहीं रूद्री के निर्माण के साथ उस लक्ष्य को पूर्ण किया जितनी संख्या आहूतियों एवं शिवलिंग निर्माण की तय की गयी थी। भक्तों के द्वारा लगाये गये जयकारों से जहां पूरा क्षेत्र गुंजायमान होता रहा तो वहीं भण्डारे में प्रसाद को भी ग्रहण श्रृद्धालुओं ने किया।
विद्वान विप्रों ने कराया अनुष्ठान-
उक्त महायज्ञ यज्ञाचार्य पं.महेद्र गर्ग एवं उनके सहायक पं.आशीष दत्त कटारे के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ। जिसमें पं.रवि शास्त्री,पं.ओमप्रकाश पाठक,पं.दुर्गेश शास्त्री,पं.आशीष कृष्ण शास्त्री,पं.सुनील दुबे,पं.उमेश मिश्रा,पं.राम अवतार शास्त्री,पं.कमलेश मिश्रा,पं.सुनील दुबे एवं पं.देवेन्द्र दुबे एवं पं.सुरेन्द्र तिवारी ने सहभागिता की।
प्रधान शक्ति पीठ,द्वारों,सहित देवों की स्थापना-
उक्त श्री हनुमत महायज्ञ के पवित्र धार्मिक आयोजन स्थल पर धार्मिक एवं वास्तु को दृष्टिगत रखते हुये पीठों सहित वेदों के द्वारों को बनाया गया था। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधान पीठ में सर्वोतोभद्र मण्डल स्थापित किया गया जिसमें श्रीराम दरबार विराजमान कराया गया था। इनके साथ ही 57 देवताओं को यहां स्थान दिया गया था । योगिनी पीठ में महाकाली,महा सरस्वती एवं महालक्ष्मी के साथ ही 64 देवियों को स्थापित किया गय था । इसी क्रम में नैऋत्य कोण में वास्तु पीठ सहित 64,वायव्य कोण में क्षेत्रपाल सहित 49,ईशान कोण में नवग्रह पीठ के साथ 47 देवताओं को विराजमान कराया गया था। उक्त महायज्ञ में मंडप में स्थित तोरण के साथ ही चारों द्वारों पर सतयुग,द्वापर,त्रेता एवं कलयुग का भी पूजनार्चन किया गया था। चार द्वार बनाये गये हैं जिसमें पूर्व ऋगवेद,दक्षिण यजुर्वेद,पश्चिम सामवेद और उत्तर में अर्थवेद को बनाया गया था।
सहयोग के लिये आभार-
उक्त भव्य धार्मिक आयोजन को संम्पन्न कराने में संपूर्ण वार्ड वासियों सहित नगर के अनेक भक्तों ने अपनी सहभागिता निभायी थी। आयोजक मंडल ने समस्त भक्तों,सहयोगियों एवं प्रेस का आभार व्यक्त किया है।
उक्त भव्य धार्मिक आयोजन को संम्पन्न कराने में संपूर्ण वार्ड वासियों सहित नगर के अनेक भक्तों ने अपनी सहभागिता निभायी थी। आयोजक मंडल ने समस्त भक्तों,सहयोगियों एवं प्रेस का आभार व्यक्त किया है।
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