हिजडों के आतंक से जूझते रेल यात्री

रेल प्रशासन सहित सुरक्षा विभाग पर उठ रहे प्रश्र ( डा.एल.एन.वैष्णव ) भोपाल/भले ही रेल विभाग यात्रियों की सुरक्षा का दम भरे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर कहती देखी जा सकती है। यात्री गाडियोंं में जहां एक ओर अनाधिकृत खाद्य सामग्री बेचने वालों का दबदबा बना रहता है तो वहीं हिजडों के आतंक से जूझते यात्रियों को लगातार देखा जा सकता है। प्रदेश की राजधानी से लेकर बात करें विभिन्न जक्शनों तथा मंडलों से प्रारंभ होने तथा गुजरने वाली गाडियों तो शायद ही कोई एैसी ट्रेन हो जिसमें बैठे यात्री हिजडों की कार्यप्रणाली एवं अवैध वसूली से प्रभावित न होते हों? दस से लेकर पचास रूपये प्रति यात्री से वसूलने में लगे इन हिजडों द्वारा प्रतिदिन हजारों रूपयों की वसूली करने की बात सामने आ रही है। विरोध करने वाले यात्रियों के साथ अश्लील हरकत की जाती है जिसके चलते वह संपूर्ण यात्रा के दौरान अपने आपको अपमानित महसूस करता रहता है और मानसिक प्रताडना का सामना करते देखा जा सकता है। एैसा नहीं की यह मामला जनरल बोगियों में हो यह माजरा आरक्षित शयनयान एवं वातानुकूलित यान में भी लगातार होते देखा जा रहा है। इसी क्रम में अनाधिकृत रूप से आरक्षित बोगियों में अन्य यात्रियों का प्रवेश रेल उपभोक्ताओं को मानसिक एवं शारीरिक प्रताडना का कारण बनता जा रहा है। रेल विभाग द्वारा इसके लिये कानून बना के रखा है परन्तु कितना और किसके विरूद्ध इसका उपयोग होता है सब जानते हैं। उक्त मामले को लेकर रेल प्रशासन एवं सुरक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर प्रश्न चिन्ह अंकित होते देखे जा रहे हैं? प्राप्त जानकारी के अनुसार धारा 144 एक 144 दो फेरी एवं भीख मांगने वालों के लिये है जिसमें एक बर्ष का कारावास तथा दो हजार रूपये जुर्माना तथा दोनो होने का उल्लेख किया गया है। धारा 147 में अनाधिकार प्रवेश या उससे हटने से इंकार करने पर प्रयोग की जाती है जिसमें 6 माह का कारावास या एक हजार रूपये जुर्माना या दोनो का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही रेल अधिनियम एवं भारतीय दण्ड संहिता के तहत रेल्वे में नियमों का उलंघन करने वालों को दण्डित करने का प्रावधान दिया गया है।

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