गंदा,भिखारियों में अव्वल के बाद अब टीकाकरण में दमोह फिसड्डी
गंदा,भिखारियों में अव्वल के बाद अब टीकाकरण में दमोह फिसड्डी
- गंदे शहर का दाग धुल न पाया कि अब टीकाकरण में नीचे पायदान
- बेखबर जनप्रतिनिधि,लापरवाह अधिकारी,परेशान जनता ?
डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव
भोपाल/ दमोह/ 08/06/2016---- देश के सबसे गंदे शहर का दाग अभी धुल ही नहीं पाया था कि एक के बाद एक ओर दाग लगना जारी है। हाल ही में भीख मांगने वालों की संख्या में सर्वाधिक जिले के होने की बात के बाद अब इसका नाम टीकाकरण में प्रदेश में सबसे फिसड्डी जिलों में दर्ज हो चुका है। विदित हो कि गत बर्ष भारत सरकार के केन्द्रीय विकास मंत्रालय के द्वारा कराये गये स्वच्छ शहरों के सर्वे में कर्नाटक राज्य का मैसूर शहर सबसे स्वच्छ एवं मध्यप्रदेश का दमोह नगर सबसे गंदा माना गया था। महत्वपूर्ण बात यह भी थी कि कर्नाटक के तीन शहरों को टाप-10 में स्थान मिला था। वहीं देश की राजधानी भी इस सर्वे में पन्द्रहवें स्थान पर अपना नाम दर्ज करा पायी है। जबकि मध्यप्रदेश का दमोह 476 वें स्थान अर्थात् सबसे नीचे है। इसी क्रम में मध्यप्रदेश के ही भिंड को 475 वां स्थान मिला था। इसी समय यह प्रश्न उपजने लगे थे कि यहां माई-बाप बने नेताओं एवं क्या उदासीन जनप्रतिनिधि एवं लापरवाह अधिकारी बेशर्मो की नाक का रूख जमें वाली कहावत को चरितार्थ करते रहेंगे या फिर अपनी कुंभकर्णी निद्रा से जागृत होंगे? प्राप्त जानकारी के अनुसार भारत सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छ भारत विषय को लेकर 42 अंक आधारित सर्वे बर्ष 2014-15 में कराया था। जिसमें 22 अंकों को ठोस अपविष्ट प्रबंधन संकेतक तथा 20 अंकों को खुले में शौच के मामले में रखा गया था। इसी क्रम में कुछ बिन्दु और थे जिन पर भी सर्वे के दौरान ध्यान दिया गया एवं उक्त सर्वे की रिपोर्ट में सम्मिलित किया गया था। जिसके तहत पेयजल की स्वच्छता,गुणवत्ता,क्षेत्र से निकलने वाली नदियों की सतह पर पानी की स्वच्छता एवं गुणवत्ता तथा पानी के प्रयोग अर्थात् पीने एवं इस्तेमाल करने होने वाले रोग तथा इन रोगों की चपेट में आने से होने वाली मृत्यू दर के आंकडों को भी सम्मिलित किया गया था। वहीं हाल ही भीख मांगने वालों की संख्या में भी दमोह का नाम जमकर सामने आया था और समाचार पत्रों की सुर्खियां भी बना लेकिन उक्त दोनो मामलों के बाद एक ओर विषय में नाम दमोह का जुडा वह है टीकाकरण में फिसड्डी होने का जिसका खुलासा सरकार के विभाग के एक सर्वे रिपोर्ट में हो चुका है।
शहर के जन प्रतिनिधि,अधिकारी-
उक्त सर्वे के दौरान अचानक देश ही नहीं विश्व के मानस पटल पर उभरे सबसे गंदे शहर के नाम को लेकर इस बात की चर्चा भी होने लगी है कि यहां के जनप्रतिधि कौन हैं? तो आपको हम बतला देना चाहते हैं कि मध्यप्रदेश के गठन से लेकर चाहे सरकार कांग्रेस की हो या फिर भाजपा की दो से तीन मंत्री यहां के रहे हैं। वर्तमान में क्षेत्र के सांसद प्रहलाद पटैल एवं लम्बे समय से अपराजेय बने विधायक तथा प्रदेश के कदबर मंत्री जयंत कुमार मलैया हैं। वर्तमान में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी हैं उक्त तीनों भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं। नगर के 39 वार्डों में से सर्वाधिक भाजपा के पार्षद हैं। यह बात अलग है कि सब पीपी के हवाले चल रहा है और मस्टर तथा मास्टर भी चर्चाओं में बने हुये हैं?
जयंत कुमार मलैया सुन्दरलाल पटवा सरकार में मंत्री रहे तो सुश्री उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पुन:मंत्री बने। बाबूलाल गौर के साथ भी मंत्रालय का कार्य संभाला तो वहीं शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने पर उनके साथ आज भी महत्वपूर्ण मंत्रालय का कार्य देख रहे हैं। इसी क्रम में मुख्य नगर पालिका अधिकारी सुधीर सिंह अपनी कार्य प्रणाली एवं वाक शैली के लिये हमेशा चर्चाओं में बने रहने वाले हाल ही में स्थानांंरित हुये और इनकी जगह पूर्व सीएमओ आरपी मिश्रा पदभार ग्रहण कर चुके हैं? जिले में कलेक्टर डा.श्रीनिवास शर्मा हैं जो कि पूर्व में यहीं डिप्टी कलेक्टर रह चुके हैं तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी है डा अजय बडोनिया हैं जो अपनी कार्य प्रणाली को लेकर सागर एवं इसके बाद दमोह में अखबारों की सुर्खियों के साथ चर्चाओं में बने रहते हैं? टीकारण अधिकारी डा.व्हीके खरे अब विभाग में नहीं हैं तथा इनकी जगह लम्बे समय से प्रभारी के रूप में डा.वीडी चौरसिया कार्य देख रहे हैं।
टीकारण में फिसड्डी प्रभावी मंत्रियों के गृह जिले -
स्वास्थ्य विभाग के एक महत्वपूर्ण अभियान को लेकर आयी सर्वे रिपोर्ट को लेकर चौंकाने वाले परिणाम सामने आये हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन जिलों के नाम इसमें सम्मिलित हैं उनमें लगभग एक दर्जन के करीब प्रदेश के मंत्रियों के या तो गृह जिले हैं या फिर वह वहां के प्रभारी हैं। उक्त सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश में एक बर्ष से दो बर्ष की उम्र वाले बच्चों को पूर्ण टीकाकरण का औसत 66.4 फीसदी बताया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बालाघाट जिले में 82.5 तथा उज्जैन जिले में 81.1 प्रतिशत बताया गया है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (सीहोर 77.6) के अलावा महिला बाल विकास मंत्री मायासिंह (ग्वालियर 76.3) बताया गया है। इसी क्रम में फिसड्डी मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी व पशुपालन मंत्री कुसुम मेहदेले के गृह जिले पन्ना में बच्चोंं के पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 38.4 है। आदिम एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री ज्ञानसिंह का गृह जिला उमरिया आता है जहां यह प्रतिशत 40.8 है। इसी प्रकार वित्त एवं वाणिज्यिक कर तथा जल संसाधन मंत्री जयंत कुमार मलैया के गृह जिले दमोह में 42.4 प्रतिशत है। राज्य के पंचायत, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक न्याय मंत्री गोपाल भार्गव तथा परिवहन, विज्ञान,तकनीक तथा जन शिकायत निवारण मंत्री भूपेंद्र सिंह दोनो ही सागर जिले के हैं जहां टीकाकरण का प्रतिशत 55 बतलाया गया है। अब बात करें रायसेन जिले की तो यहां से तीन मंत्री हैं मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार और रामपाल सिंह तथा एक राज्यमंत्री सुरेंद्र पटवा शामिल हैं यहां पूर्ण टीकाकरण का औसत 53.2 बतलायी गयी है। राज्य के श्रम एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री अंतरसिंह आर्य के बड़वानी जिले में औसतन 68.3 प्रतिशत है। लोकनिर्माण मंत्री सरताज सिंह के जिले होशंगाबाद में 67.4 प्रतिशत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री विजय शाह के जिले खंडवा में 64.5 प्रति. तथा उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया के शिवपुरी जिले में 64.3 प्रति. टीकाकरण पाया गया है। इसी क्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा के गृह दतिया जिले प्रतिशत 63.5 है। तो ऊर्जा मंत्री राजेंद्र शुक्ल के गृह रीवा जिले में पूर्ण टीकाकरण का औसत 61.1 प्रति. बतलाया गया है।

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