अभी तो हम जिंदा है - जादूगर आनंद

अभी तो हम जिंदा है - जादूगर आनंद

  • मदारियों से मिली जादूगर बनने की प्रेरणा
  •   पत्रकार वार्ता में साझा किये अनुभव,दिये प्रश्रों के उत्तर
                                                 डा.एल.एन.वैष्णव

दमोह/ 05/04/2016--जीवन में हमेशा अच्छी चीजों को याद रखता हुं जो जीवन पर बुरा प्रभाव डालें उनको भूल जाता हुं हमेशा कुछ नया करने की सोच कर आगे बढता रहता हुं यह बात जादूगर आनंद ने एक प्रश्र के उत्तर में कही। एक प्रश्र के उत्तर में कहा कि सडक पर तमाशा दिखाने वाले मदारियों को देख-देख में जादूगर बन गया इनके कारण ही मुझे इस क्षेत्र में आने की प्रेरणा मिली यह बात महान जादूगर आनंद ने कही। जादू जैसी कला को लेकर आज तक कोई भी सरकार ने कुछ नहीं किया इस बात को लेकर हमेशा चिंतित एवं प्रयासरत रहता हूं। विदित हो कि गत 15 बर्ष बाद दमोह में इनका शो होने जा रहा है इतने लम्बे अंतराल में जादू की इस कला के दौर में कई उतार चढाव आये और इन्होने देखे भी हैं। समीप के ही जबलपुर जिले मेें जन्में श्री आनंद ने बतलाया कि 36 देशों में वह 30 हजार से अधिक शो कर चुके हैं। एक प्रश्न के उत्तर में इन्होने बतलाया कि यह वह कला है जिसके कारण आज लाखों परिवार पल रहे हैं।
साढे चार लाख जादूगर देश में -
 भारत में अकेले छोटे-बडे साढे चार लाख जादूगर हैं जिनके हिसाब से देखा जाये तो एक परिवार के पांच लोग यानि कि लगभग 20-22 लाख लोगों के यह जीवन निर्वाह का साधन बना हुआ है तो वहीं यह मतदाता के रूप में अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। देश की आजादी के बाद आज तक किसी भी सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया कि इस कला को आगे बढाने की दिशा में कुछ किया जाये। मेरी हमेशा मंाग रही है सरकार को आगे आके इसके लिये पहल करनी चाहिये निजि तौर पर हम लोग कुछ भी कर सकते हैं परन्तु वह निजि होगा और सरकारी-सरकारी होगा। अकादमी खुलना चाहिये जहां इस कला को सिखाया जा सके और विलुप्त होती कला को बचाया जा सके। सर्कस की तरह कहीं यह कला भी लुप्त न हो जाये इस बात की चिंता इनके चेहरे पर साफ देखने को मिली। 
अभी हम जिंदा हैं-
बीच में लगातार यह अफवाह उडायी गयी थी कि जादूगर आनंद की मृत्यू हो चुकी है परन्तु यह गलत बात थी इसको बतलाने के लिये भी मैने लगातार शो की संख्या बढाने एवं आपके बीच आने का निर्णय लिया है कि अभी हम जिंदा हैं। एक प्रश्र के उत्तर में कहा कि जादूगर के रूप में विदेशों में देश का नाम रोशन कर लगातार विदेशी मुद्रा भारत में लाते रहते हैं जो काफी बडी मात्रा में होती है। सरकार को इस दिशा में चिंता कर जादू का संरक्षण करना चाहिये,जादूगरों के संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते उनके सामने लगातार इससे जुडी समस्यायें आती रहती हैं। एक प्रश्र के उत्तर में बतलाया कि जो बात भारतीय जादू में है वह कहीं नहीं है जो विदेशी शो एवं टेलीविजन पर दिखता है हकीकत में वह वैसा नहीं होता है। 
आचार्य रजनीश को भी जादूगर बनाया-
एक प्रश्र के उत्तर में बतलाया कि वह महान चिंतक,दार्शनिक आचार्य रजनीश के साथ भी रहे एवं उनको भी जादू सिखाया। एक प्रश्न के उत्तर में इन्होने बतलाया कि वह कुछ नया लेकर इस समय यहां आये हैं जो कि दमोह के लिये खास होगा क्योंकि एक तो में समीपस्थ जिले का हुं तथा दमोह से मेरा विशेष लगाव है। साथ ही यह बतलाने आया हूं कि अभी में जिन्दा हूं। इन्होने बतलाया कि बीच में लगातार यह अफवाह उडायी गयी थी कि जादूगर आनंद की मृत्यू हो चुकी है। 
जूनियर आनंद ने बनाया कीर्तिमान-
एक प्रश्र के उत्तर में बतलाया कि वह अपने उत्तराधिकारी के रूप में अपने बेटे जादूगर आनंद जूनियर को मानते हैं। जिसने 18 बार मौत को चुनौती देकर विजय प्राप्त की है। इनके नाम दो विश्व कीर्तिमान भी हैं जिसमें प्रथम द ग्रेट ब्लास्टर शो एवं द्वितीय है अंडर वाटर एस्केप वह आंखों पर पट्टी बांधकर देश विदेश में चार हजार किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हंै। इन्होने बतलाया कि जादूगर आनंद जूनियर ने द ग्रेट फायर स्केप,द ग्रेट अंडर वाटर,द ग्रेट ब्लांईड फोल्ड बाईक राईड,द ग्रेट गुलियोटाईन एवं ग्रेट रनिंग ट्रेन एस्केप यानि चलती रेल गाडी को गायब शामिल हैं। इन्होने अनेक जानकारियों को पत्रकारों के प्रश्रों के उत्तर के साथ साझा किया। 
दिव्यांगों,गरीब हमारे अतिथि-
एक प्रश्र के उत्तर में कहा कि दिव्यांग,गरीब हमारे अतिथि हैं हम उनको विशेष रूप में शो देखने आमंत्रित करते हैं। साथ ही स्कूल के छात्र-छात्राओं को भी विशेष छूट देते हैं। इनका अधिकार भी जादू देखने का है इसलिये यह वंचित न रहें इस बात का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। 

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