आस्था से खिलबाड,गंदे सरोवर में जवारे विसर्जन
आस्था से खिलबाड,गंदे सरोवर में जवारे विसर्जन
- जिला प्रशासन सहित संबधित विभाग की लापरवाही
- सडक निर्माण कंपनी ने बंद किया मार्ग
रिपोर्ट-डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/16/04/2016- इसे जिला प्रशासन सहित संबधित विभाग की लापरवाही एवं आस्था के साथ खिलवाड नहीं तो क्या कहेंगे कि सनातन धर्म के अनुयायियों को गंदे जल में माँ जगदम्बा का प्रतीक जवारे का विसर्जन करने के लिये मजबूर होना पड रहा है। आस्था एवं धर्म के साथ खिलबाड बतलाते हुये लोगों में जमकर आक्रोश जहां जनप्रतिनिधियों के प्रति देखा गया तो वहीं नगर पालिका सहित जिला प्रशासन पर भी अपना गुस्सा शब्दों के द्वारा निकालते लोगों को देखा एवं सुना गया। ज्ञात हो कि सनातन धर्म में नवरात्रि का अपना एक अलग महत्व है जिसमें दो नवरात्रि प्रत्यक्ष रूप से दो गुप्त नवरात्रि कहलाती हैं। सनातन धर्म को मानने वाले अपने नये बर्ष का शुभारंभ,स्वागत माता रानी की आराधना से करते हैं जिसमें वृत,जवारे स्थापना के साथ करते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस क्रम में अंतिम दिन माता के प्रतीक जवारों को जल में विसर्जन किया जाता है। बुंदेलखण्ड में इसको अपने तरीके से मनाते हैं जिसमें महिलाओं द्वारा भक्तें जिन्हे देवी गीत कहा जाता है को गाती हैं। स्थानीय दीवान जी की तलैया जो कि जवारे विसर्जन के लिये कई दशकों से इस्तेमाल की जाती है की स्थिति इस समय किसी से छिपी नहीं है? परन्तु जिला प्रशासन सहित संबधित विभाग तो मानो अंधा बना हुआ है? गंदगी एवं चोई के कारण तलैया खेल मैदान सी प्रतीत होती है। जहां एक ओर इसमें नगर पालिका ने गंदा नाला जोडा तो वहीं सडक निर्माण में लगी कंपनी ने घाटों को बंद कर नाले को जोड दिया। जिसके कारण भी स्थिति और दयनीय बन गयी है तथा लोगों का आक्रोश भी सर चडकर बोल रहा है।
नपा के दावों की खुलती पोल-
नगरपालिका द्वारा भले ही लाख दावे किये जायें कि नगर की साफ-सफाई व्यवस्था पटरी पर है परन्तु इनके दावों की पोल लगातार खुल रही है। हिन्दुओं के एक बडे पर्व पर भी दीवानजी की तलैया में गंदगी इनके दावों की पोल रही है। यह कोई प्रथम बार नहीं कुछ माह पूर्व कंजलियां के त्यौहार में भी हो चुका है। चारों ओर गंदगी का आलम एवं नगर पालिका की अध्यक्ष तथा पदाधिकारियों सहित अधिकारियों की इस घोर लापरवाही को लेकर जमकर श्रृद्धालुओं ने कोसा यहां तक कि इनकी लापरवाही का खामियाजा स्थानीय विधायक को भी खरी खोटी सुनाने से एक महिला श्रृद्धालू नहीं चूकी। लोगों के मुंह से चर्चा के दौरान एक वर्ग विशेष को पूरी सुविधा साफ-सफाई वोट बैंक की राजनीति के चलते दी जाती है परन्तु हिन्दु त्यौहारों पर यह धृतराष्ट्र बन जाते हैं?
विकास की भेंट चढ़े सरोवर-
इतिहास पर अगर नजर डालें तो नजर का ही एक वृहद सरोवर को मात्र इसलिये मिट्टी और मलबे से पूर दिया गया क्योंकि वहां शापिंग सेन्टर का निर्माण किया जाना था। यह सब हुआ उस समय जब प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी, जी हां हम बात कर रहे हैं कचौरा तालाब की जो कि वर्तमान में कचौरा शापिंग सेन्टर के नाम से जाना जाता है। वहीं एक छोटा तालाब जिसे उमा मिी की तलैया के नाम से जाना जाता है वह भी समाप्त कर दिया गया। इसी क्रम में अगर देखें तो गत कुछ वर्षो पूर्व ही कैदों की तलैया के नाम से पहचाने जाने वाला छोटा सरोवर पूर दिया गया जहां आज मानस भवन एवं श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। इस समय प्रदेश और नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी का शासन था। इतिहास की ओर नजर डालें तो नगर के ही मध्य का एक वृहद महज इसलिये मलवा और मिट्टी से पूर दिया गया कि वहां एक शापिंग सेंटर का निर्माण किया जाना था। जी हां हम बात कर रहे है कचौरा शापिंग सेंटर की जहां वर्तमान में दुकाने ही दुकाने नजर आ रही हैं। यही हाल उमा मिी के नाम से विख्यात तलैया का हुआ। यहां यह उल्लेख कर देना आवश्यक हो जाता है कि इस समय प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी। वहीं कुछ ही बर्ष पूर्व एक और छोटा सरोवर जिसे कैदों की तलैया के नाम से जाना जाता था विकास की भेंट चढा दिया गया। वर्तमान में वहां मानस भवन और श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। जिस समय यह कार्य हुआ उस समय प्रदेश और नपा में भाजपा सत्ता में काबिज थी।
लाखों खर्च कर गंदा नाला जोडा-
प्राचीन सरोवर दीवान जी की तलैया में नगर पालिका परिषद ने लाखों रूपयों की फाग खेलते हुये एक गंदे नाले को जोड इसे और गंदा बनाने में अपनी आहुति दे दी। जानकारों की माने तो विश्व में किसी भी गंदे नाले को किसी सरोवर से नहीं जोडा जा सकता है। जबकि यह कार्य खुलेआम हुआ और वह भी पुलिस की जमीन से होकर कहा जाये कि पुलिस की छाती पर खुटा गाडकर तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
--------------००००००००००००००००------------------






टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें