बिना वेश बन रहे डिवाईडरों की गुणवत्ता पर उठ रहे प्रश्र
बिना वेश बन रहे डिवाईडरों की गुणवत्ता पर उठ रहे प्रश्र
- चला चली की बेला में निर्माण कंपनी के साथ ठेकेदारों की पौ बारह
- एमपीआरडीसी के अधिकारियों की मिली भगत की भी चर्चा
- -डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/04/04/2016--- जिला मुख्यालय पर हो रहे विकास कार्यो में लगातार बट्टा लगाने के कार्य हो रहे हैं तथा जन प्रतिनिधियों सहित संबधित अधिकारियों का धृतराष्ट्र की भूमिका में होना निश्चित रूप से उनकी नियत में गडबडी होने का संकेत पैदा कर रहा है? जी हां एैसी ही बात लगातार जनता के मुंह से हर जगह सुनी जा सकती है। हम फिलहाल एक सडक के निर्माण एवं उनमें बनन रहे डिवाईडरों की ओर आपका ध्यान आर्कषित कराना चाह रहे हैं। विदित हो कि तीन गुल्ली से लेकर कटनी तक का सडक निर्माण कार्य अपनी कछुआ गति से चल रहा है और यह मार्ग 119 किलोमीटर का बनना था सडक कार्य का तो लगभग पूर्ण होने की बात की जा रही है परन्तु कितनी,कैसे और कहां बनी यह तो सब जग जाहिर है। यहां निर्माण कार्य में लगे ठेकेदारों के साथ कुछ पेटी कांटेक्टरों के साथ संबधित विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से जनता के पैसों की जमकर फाग खेली जा रही है। ज्ञात हो कि सरकार के पास जो पैसा जाता है वह जनता के पास से कर के रूप में जाता है यानि जो होता है वह सब जनता का होता है किसी मंत्री,विधायक,सांसद का नहीं एैसा कानून के जानकार बतलाते हैं इसी पैसों को उक्त लोग अपने जेबों में भरने में लगे देखे जा सकते हैं।
गुणवत्ता सहित उम्र पूरी करने पर संशय-
उक्त सडक निर्माण के दौरान नगर के अंदर बन रहे डिवाईडरों में बनाओ मिटाओ की राजनीति लगातार चल रही है। बिना वेश के बनने वाले इन डिवाईडरों की गुणवत्ता सहित इनकी निर्धारित उम्र पूर्ण करने में संशय उत्पन्न होने लगा है? इस विषय के जानकार बतलाते हैं कि इस प्रकार के निर्माण किये ही नहीं जा सकते हैं? वहीं दूसरी ओर बतलाया जा रहा है कि कंपनी किसी भी प्रकार अपना कार्य समेट कर यहां से भागने की तैयारी में हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बीओटी के तहत उक्त सडक का निर्माण कराया जा रहा है तथा एमपीआरडीसी की पूरी निगरानी इसमें होती है। साथ ही भारत सरकार के संबधित विभाग के मानकों के आधार पर इसको बनना या बनाना चाहिये? परन्तु क्या एैसा हो रहा है तो कागजों में भले ही उत्तर को हां में दर्ज करा दिया जा रहा हो परन्तु वास्तविक में यह न ही कहा जायेगा।

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