आधा दर्जन से अधिक तालाब,दो दर्जन से अधिक कुये,बाबडी

आधा दर्जन से अधिक तालाब,दो दर्जन से अधिक कुये,बाबडी 

  •   शहर प्यासा,अधिकारियों ,जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का नमूना 

                                    डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/ 10/04/2016 आधा दर्जन से अधिक तालाब एवं दो दर्जन से अधिक कुये बाबडियों का शहर फिर भी प्यासा और जल संकट से जूझ रहा है? सैकडों बर्ष प्राचीन इन जल स्त्रोतों का रख रखाव एवं साफ-सफाई के आभाव में दम टूटने लगा है। लापरवाह अधिकारी,उदासीन जनप्रतिनिधियों के चलते जनता की परेशानी साफ देखी जा सकती है। सूत्रों की माने तो पिछले कई बर्षों के दौरान करोडों रूपयों की फाग खेली जा चुकी हैं। हम आपको बतला दें कि यह वह शहर है जो प्रदेश के वित्त ,वाणिज्ज एवं जल संसाधन मंत्री जयंत कुमार मलैया का गृह नगर है। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी हैं जो भारतीय जनता पार्टी की हैं तथा 39 में से सर्वाधिक वार्डो पर भाजपा का कब्जा है। पिछले कई दशकों से यह नगर जल संकट से जूझ रहा है अधिकांश सरोवरों को विकास की भेंट चढा दिया गया है। पीपी एवं मस्टर एवं मास्टर के हस्तक्षेप वाली नगरपालिका की चर्चा इस समय जमकर बनी हुई है? जानकार बतलाते हैं कि अगर सरोवर,कुये बाबडियों को सही ढंग से मरम्मत कर उनकी साफ-सफाई कर दी जाये तो नगर की जल समस्या का समाधान हो सकता है। 
कहां-कहां कुआ,बाबडी-  
नगर में दो दर्जन से अधिक कुआ एवं बाबडियां सैकडों बर्ष प्राचीन हैं जो कि नगर सहित बाहर से आने वाले राहगीरों के सूखे कंठों को तर करने का कार्य करती थीं। इनके निर्माण के लिये स्थल का चुनाव करना भी अपने आप में पूर्वजों की बुद्धिमता को प्रणाम करने का मन किसका नहीं होता होगा। जब भीषण गर्मी में पानी की त्राहि-त्राहि हो रही हो और यह जल स्त्रोत पानी से लबालब भरे हों? नगर की प्रमुख कुये बाबडियों पर अगर नजर डालें तो पुलिस कंट्रोल रूम के पास,मछरया कुंआ,ब्लाक ऑफिस परिसर,बारहद्वारी,न्यायालय परिसर,जेल के पीछे,राम मंदिर,धरमपुरा,कलेक्ट्रर बंगला के पास,आईबी ऑफिस के पास,मल्लपुरा,फिल्टर,सीता बाबडी,तमरयाई,ईसाई मुहल्ला शांतिबाई के घर के पास,परेश लायल के घर के पास,डा.विजय लाल निवास के पीछे,कलेक्ट्रेड,जटाशंकर,बुंदाबहु मंदिर,पुरैना तालाब के पास आदि प्रमुख बतलाये जाते हैं। 
विकास की भेंट चढ़े सरोवर-
इतिहास पर अगर नजर डालें तो नजर का ही एक वृहद सरोवर को मात्र इसलिये मिट्टी और मलबे से पूर दिया गया क्योंकि वहां शापिंग सेन्टर का निर्माण किया जाना था। यह सब हुआ उस समय जब प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी, जी हां हम बात कर रहे हैं कचौरा तालाब की जो कि वर्तमान में कचौरा शापिंग सेन्टर के नाम से जाना जाता है। वहीं एक छोटा तालाब जिसे उमा मि ी की तलैया के नाम से जाना जाता है वह भी समाप्त कर दिया गया। इसी क्रम में अगर देखें तो गत कुछ वर्षो पूर्व ही कैदों की तलैया के नाम से पहचाने जाने वाला छोटा सरोवर पूर दिया गया जहां आज मानस भवन एवं श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। इस समय प्रदेश और नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी का शासन था। इतिहास की ओर नजर डालें तो नगर के ही मध्य का एक वृहद महज इसलिये मलवा और मिट्टी से पूर दिया गया कि वहां एक शापिंग सेंटर का निर्माण किया जाना था। जी हां हम बात कर रहे है कचौरा शापिंग सेंटर की जहां वर्तमान में दुकाने ही दुकाने नजर आ रही हैं। यही  हाल उमा मि ी के नाम से विख्यात तलैया का हुआ। यहां यह उल्लेख कर देना आवश्यक हो जाता है कि इस समय प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी। वहीं कुछ ही बर्ष पूर्व एक और छोटा सरोवर जिसे कैदों की तलैया के नाम से जाना जाता था विकास की भेंट चढा दिया गया। वर्तमान में वहां मानस भवन और श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। जिस समय यह कार्य हुआ उस समय प्रदेश और नपा में भाजपा सत्ता में काबिज थी।




लाखों खर्च फिर भी नतीजा सिफर-
देखा जाये तो कडोरों रूपयों की राशि सरोवरों की साफ-सफाई एवं गहरीकरण में हो चुके हैं फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। यह सिलसिला आज भी जारी है नगर के ही मध्य के ही फुटेरा तालाब की बात करें या फिर बेलाताल की तो जो कुछ हो रहा है या होता है किसी से छिपा नहीं है। बात करें फुटेरा तालाब की तो जानकारों केे अनुसार ३०-३५ एकड की परिधि में फैला है जबकि देखके इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि कितना क्षेत्र अतिक्रमणकारियों के पास है। ज्ञात हो कि यही वह तालाब है जहां दुर्गा एवं गणेश प्रतिमाओं का विर्सजन होता है और नगर की बडी आबादी इसके जल का इस्तेमाल करती है। वहीं अगर बेलाताल की बात करें तो आप देखेंगे कि छपा और दिखा रोग से पीढित बीमारी बढने पर उसका निदान कैसे करते नजर आते रहे किसी से छिपा नहीं है?

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