मध्यप्रदेश में प्रशासन प्रभारियों के भरोसे,अधिकारियों पर कार्य का बोझ


कहीं पदोन्नती नहीं तो कहीं अतिरिक्त प्रभार का दबाब 

                                                              

                                                               (   डा.एल.एन.वैष्णव )

भोपाल/ 17/03/2016 किसी भी सरकार की योजनाओं को अमली जामा पहनाने में प्रशासन के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है जिसके लिये अलग-अलग विभागों हैं। प्रदेश में लम्बे समय से प्रभारियों के भरोसे एक दो नहीं अपितु शायद ही कोई विभाग हो न चल रहा हो यहां तक कि कदवर मंत्रियों के गृह जिले और नगर भी प्रभारियों के हवाले हैं। मध्यप्रदेश के कदवर मंत्री जयंत मलैया का जिला तो प्रभारी कलेक्ट्रर के भरोस कुछ दिन नहीं अपितु कई महिनों चल चुका है जो संभवत: देश का प्रथम कलेक्टर विहीन जिले की सूची में दर्ज होने की बात जानकार बतलाते हैं? विदित हो कि मध्यप्रदेश सरकार कई बर्षों से इस ओर ध्यान नहीं देकर अनेक महत्वपूर्ण विभागों को प्रभारियों के हवाले किये हुये है। अनेक जगहों पर तो एक अधिकारी के पास एक साथ दो तीन विभागों के प्रभार सौंप रखे हैं जिसके चलते कितना कार्य समय सीमा में सम्पन्न हो पा रहा होगा यह तो आप अंदाजा स्वयं लगा सकते हैं? जानकार बतलाते हैं कि जहां कार्य प्रभावित होते हैं तो वहीं शासकीय कार्यों के बोझ के चलते अधिकारियों में नीरसता आने लगती है? बतलाया जाता है कि अनेक फाईलें तो इसी कारण अटकी पडी हैं जिसके चलते शासन की योजनओं को भले ही कागजों में अमली जामा पहना दिया जाता हो परन्तु जमीनी हकीकत तो कुछ ओर कहती दिखती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य में जल संसाधन विभाग में लगभग चार बर्षोंसे ईएनसी का पद रिक्त पडा हुआ है यह कार्य संविदा के माध्यम से संचालित हो रहा है। 
  • कहां किसके भरोसे-विभागों की कमान-
प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, तकनीकी शिक्षा विभाग, ग्रामोद्योग एवं उद्यानिकी, संस्कृति-धर्मस्व, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रोफेशनल एक्जामिनेशन बोर्ड, राजस्व आदि विभागों जैसे महत्वपूर्ण विभाग प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि  बोर्ड तथा  स्थानीय परीक्षाओं के समय भी आयुक्त लोकशिक्षण का पद रिक्त पड़ा है। इसी क्रम में अगर देखें तो प्रदेश के ही सागर एवं नर्मदापुरम् संभाग में आयुक्त का पद रिक्त है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: एडिशनल चीफ सेक्रटरी (एसीएस) के पद पर पदस्थ अरुणा शर्मा प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में अपनी सेवायें देने जा चुकी हैं जिसके चलते यह पद भी रिक्त पडा हुआ है। फिलहाल यह पद प्रभारी के रूप में अलका उपाध्याय तथा  सामाजिक न्याय विभाग का अतिरिक्त प्रभार मनोहर अगनानी के पास है। तकनीकी शिक्षा विभाग प्रमुख सचिव संजय सिंह भी प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में चले गए उनका प्रभार स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त पंकज अग्रवाल के पास है। प्रदेश के जनसंपर्क एसके मिश्रा मुख्यमंत्री सचिवालय में प्रमुख सचिव के साथ जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव के साथ ही वह स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड तथा माध्यम के एमडी का दायित्व भी निभा रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में दीप्ति गौड़ मुखर्जी विभाग की सचिव, राज्य शिक्षा केंद्र की आयुक्त के साथ -साथ लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त का कार्य भी देख रही हैं। राजस्व विभाग में प्रमुख सचिव केके सिंह अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य देख रहे हैं। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की बात करें तो मनु श्रीवास्तव विभाग के प्रमुख सचिव के साथ आयुक्त के साथ वे एमडी ऊर्जा विकास निगम का दायित्व का निर्वाहन करने में लगे हुये हैं। वर्तमान में संस्कृति और धर्मस्व: विभाग का अतिरिक्त प्रभार वाणिज्यिक कर विभाग प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव के पास है। कमिश्नर पंचायतराज से आयुक्त रघुवीर श्रीवास्तव को हटाने के बाद आज भी विभाग में कमिश्नर की पदस्थापना नहीं होने से प्रभारी के रूप में अतिरिक्त सचिव बृजेंद्र कुमार देख रहे हैं। वीएल कांताराव उद्योग विभाग आयुक्त के साथ ही  लघु उद्योग निगम के एमडी का कार्य देख रहे हैं। सतीश मिश्रा मुख्य सचिव के ओएसडी के साथ मप्र पाठ्यपुस्तक निगम के एमडी का अतिरिक्त प्रभार तथा एमके वाष्र्णेय सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव के साथ श्रम विभाग की अतिरिक्त् जिम्मेदारी 
संभाल रहे हैं।
  • वित्त मंत्री का गृह जिला भी प्रभारी के भरोसे-
वित्त मंत्री जयंत मलैया के ही गृह जिले में ही सर्व शिक्षा अभियान में डीपीसी के पद पर प्रभारी के रूप में लगभग दो बर्षो से राजेन्द्र पटैल पदस्थ हैं। भ्रष्ट्राचार के आरोप में चर्चाओं में बने रहने तथा जांच के दायरे में होने के बाद भी यह यहां पदस्थ हैं। सूत्र बतलाते हैं कि पथरिया विधायक के रिश्तेदार एवं मंत्री की नजदीकि काफी है। कलेक्ट्रेड का अधीक्षक पद भी लम्बे समय से प्रभारी के भरोस है तो पंचायत समाजिक न्याय के उप संचालक का पद भी लम्बे समय से रिक्त है एवं वर्तमान में तेंदूखेडा एसडीएम इसका अतिरिक्त प्रभार देख रहे हैं। भू- अभिलेख के साथ श्रम विभाग का भी यही हाल है। नगर दण्डाधिकारी का पद रिक्त है तो लगभग तीन डिप्टी कलेक्टर के पद का कार्य प्रभारियों के भरोसे चल रहा है। तहसीलदार के पद भी रिक्त बतलाये जाते हैं तो अति महत्वपूर्ण विभाग जनसंपर्क भी कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अन्नदाता को खून के आॅंसू नहीं रोना पड़ेगा - प्रहलाद सिंह पटेल

नाना साहबपानसे स्मृति कार्यक्रम उचित गरिमा मिलनी चाहिए -प्रहलाद पटेल