किसानों पर ओले और अधिकारी भरने लगे अपने झोले


 किसान सभाओं के माध्यम से अधिकारियों का बंदरबंाट ?

 शासन की योजना में लग रहा पलीता
                                                (   डा.एल.एन.वैष्णव )
दमोह/15/03/2016 भले ही धरती पुत्र किसानों के साथ भारत एवं मध्यप्रदेश सरकार खडे होने की बात करती हो इसके लिये वह योजनाओं का संचालन कर उस पर अरबों रूपयों खर्च करती हो परन्तु क्या जमीनी स्तर पर लाभ मिल पा रहा है? कुछ अधिकारी,कर्मचारियों की सांठ गांठ के चलते योजनाओं में जमकर पलीता लगाने का कार्य हो रहा है? जिसके चलते जहां एक ओर शासन की योजनाओं का सही लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है तो वहीं दूसरी ओर जनता में शासन के प्रति आक्रोश एवं गलत संदेश जा रहा है। फिलहाल हम आपका ध्यान जिले में मध्यप्रदेश शासन की एक विशेष योजना में होने वाले गडबड झाले की ओर आकृष्ट कराने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश सरकार के किसान कल्याण तथा कृषि विभाग द्वारा सम्पूर्ण प्रदेश भर में प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर किसान सभाओं को किया जा रहा है। दिनांक 01 मार्च से प्रारंभ उक्त किसान सभाओं को 15 अप्रेल 2016 तक किये जाना है। इसके पीछे का उद्ेश्य किसानों को भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना  बतलाया जाता है। संकट की घडी में सरकारें किसानों के साथ हैं तथा उनको पूर्ण सहायता प्रदान करने की दिशा में कार्य कर रही हैं इस प्रकार का संदेश भी इन किसान सभाओं के माध्यम से देने का उद्ेश्य है। किसान कल्याण एवं कृषि विभाग के जिला कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभी तक 150 ग्राम पंचायतों में किसान सभाओं का आयोजन हो चुका है।
460 ग्रा.पंचायतों में 23 लाख-
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले की 460 ग्राम पंचायतों में 05 हजार रूपये के हिसाब से 23 लाख रूपये उक्त किसान सभाओं के सम्पन्न कराने के लिये आवंटन दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 1500/- सौ रूपये टेंट,1000/-रूपये स्वल्पहार,1000/-रूपये,परिवहन,300/-रूपये,मानदेय कृषि विशेषज्ञ के लिये,1000/-रूपये,प्रचार-प्रसार एवं 200/-रूपये अन्य के लिये रखी गयी है।
क्या हो रहा है-
मध्यप्रदेश शासन की उक्त अति महत्वपूर्ण योजना को किस प्रकार पलीता लगाया जा रहा है सबके सामने है? टेंट,स्वल्पहार,प्रचार-प्रसार,परिवहन में बंदरबांट होने की जानकारी लगातार प्राप्त हो रही है? विभिन्न ग्राम पंचाचतों से प्राप्त फोटो इसकी कहानी स्वयं कहते नजर आते हैं? सूत्र बतलाते हैं कि जिले के अधिकारी से लेकर किसान सभाओं को सम्पन्न कराने में लगे सब हमाम में नंगे हैं? अगर 05 हजार रूपये प्रति किसान सभा के हिसाब से 150 ग्राम पंचायतों में 07 लाख 50 हजार खर्च हो चुके हैं। बिना किसी टेंट,माईक,कुर्सी के कहीं फर्श पर तो कहीं खेतों की मेड पर किसान सभाओं को कुछ उंगलियों पर गिने जाने वाले लोगों को एकत्रित कर किसान सभाओं को कर किस प्रकार शासन के यानि जनता के पैसों की फाग खेली जा रही है स्पष्ट्र देखी जा सकती है। सूत्र बतलाते हैं कि किसानों पर ओले पड रहे हैं और अधिकारी अपने झोले भरने में लगे हुये है?

इनका कहना है-
- मैने अभी किसी भी किसान सभा में भाग नहीं लिया है इसलिये जानकारी नहीं है। क्या हो रहा है यह महत्वपूर्ण नहीं है महत्वपूर्ण यह है कि प्रचार-प्रसार हो रहा है। पूंछने पर कि इतने बडे पैमाने पर गडबडी की शिकायतें आ रही हैं तो वह कहते हैं कि सब अपने जेब से कर रहे हैं
बी.एल.कुरील 
उप संचालक 












किसान कल्याण एवं कृषि विभाग दमोह
-कागजों पर औपचारिकतायें हो रही हैं जमीनी हकीकत यह है कि सब बंदरबांट हो रहा है। न तो मुनादी हो रही है न ही शासन की योजना का सही ढंग से क्रियांन्वयन मैने स्वयं आंखों से देखा है। 
रमेश यादव 
जिला अध्यक्ष
 भारतीय किसान संघ दमोह 

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