बायो वेस्ट के नियमों की उडती धज्जियां,सांसद ने भी लिखा पत्र
महिनों बाद भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने नहीं दिया जबाब
( डा.एल.एन.वैष्णव)
दमोह/10/03/2016- 

अस्वस्थ लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके तथा स्वस्थ्य लोग अस्वस्थ्य न हो सकें इसके लिये सरकार लगातार प्रयास में लगी रहती है परन्तु संबधित विभाग के लापरवाह अधिकारियों के चलते नियमों को बलाये ताक रख कार्य करने से कितना लाभ मिल पाता है लोगों को किसी से छिपा नहीं है? फिलहाल हम इस दिशा में ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं कि किन कारणों से बीमारियों को रोका जा सकता है और क्या हो रहा है। भारत सरकार,मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा प्रत्येक चिकित्सालय में बायोवेस्ट को नष्ट करने के लिये नियम बनाये हुये हैं तो वहीं बायो वेस्ट को नष्ट्र करने के लिये करोडों रूपये भी खर्च कर रही है। इसके बाबजूद भी क्या सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य हो रहा है इस बात के प्रश्र आपके मन उस समय आ जायेंगे जब जिले के निजि,शासकीय तो दूर जिला चिकित्सालय का ही हाल आपकी आंखों के सामने होगा। जी हां यह कडवी सच्चाई है जहां बायोवेस्ट को नियमानुसार नष्ट्र करने का शायद कोई इंतजाम नहीं किये गये हैं और अगर हैं तो वह सिर्फ फाईलों और कागजों तक ही सीमित हो सकते हैं? इस बात को लेकर गत दो-तीन बर्ष समाचार पत्र के इस प्रतिनिधि द्वारा प्रमुख सचिव स्वास्थ्य डा.प्रवीण कृष्णन से प्रश्र किया गया था जिस बात का जबाब तो वह नहीं दे पाये थे।
सांसद का पत्र भी हवा में-
उक्त विषय को लेकर क्षेत्रीय सांसद प्रहलाद पटैल ने चिंता जाहिर करते हुये जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को एक पत्र लिखा था जिसका जबाब वह एक दो नहीं अपितु कई महिनों बाद भी नहीं दे पाये। अगर यह कहा जाये कि सांसद के पत्र को भी हवा में उडा दिया गया तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार सांसद कार्यालय के पत्र क्रमांक 2015/574 दिनांक 04/04/2015 को लिखे पत्र में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से जिले में बायोमेडीकल डिस्पोजल प्लांट इन्सीनेरेशन की उपलब्धता की जानकारी चाही गयी थी। सूत्र बतलाते हैं कि आज दिनांक उक्त जानकारी एवं पत्र का जबाब तक देना मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने शायद उचित नहीं समझा अगर कहा जाये कि सांसद के पत्र को हवा में उडा दिया गया तो शायद गलत नहीं होगा?
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