फैल रहा भ्रम यह रास्ता या वह जायें तो कहां ?

फैल रहा भ्रम यह रास्ता या वह जायें तो कहां ?

  सडक निर्माण कंपनी ने लगवाये दमोह नगर में भ्रमात्मक बोर्ड
  लापरवाह अधिकारी,उदासीन जनप्रतिनिधि,परेशान जनता
                                                                              (   डा.एल.एन.वैष्णव )





दमोह/ 22/03/2016--यहां जायें या वहां इस रास्ते या फिर उस रास्ते जो सही बतलाता है वह गलत हो जाता है और जो बोर्ड बतलाता है वह भ्रम फैला देता है।  जी हां यह कोई भूल भुलईयां वाली फिल्म या फिर उपन्यास की कहानी नहीं एक वह सच्चाई है, जो दमोह नगर में प्रवेश करने वाले अंजानों के लिये परेशानी का कारण बन रही है तो वहीं दूसरी ओर नगर वासियों में चर्चा का बिषय लगातार बन रही है। हम आपके सामने वह सच्चाई रखने जा रहे हैं जो या तो किसी जिम्मेदार अधिकारी,नेता को दिखलायी नहीं दे रही है या फिर जानबूझकर अंजान बनने का ढोंग किया जा रहा है? वर्तमान में दमोह नगर के मुख्य चौराहों,तिराहों एवं मार्ग में कुछ बोर्डों को संकेत प्रदान करने के लिये लगाया जा रहा है एवं अधिकांश लगाये भी जा चुके हैं जिनमें दिये गये संकेत संबधित अधिकारी,निर्माण कार्य में लगी कंपनी एवं स्थानीय जनप्रतिधियों की लापरवाही का जीता जागता उदाहरण प्रस्तुत करने में लगी हुई है। ज्ञात हो कि दमोह से लेकर कटनी तक का मार्ग बंसल कंपनी बना रही है जो कि अब चला चली की बेला में हैं और जल्द कार्य को समेटने के चक्कर में लगी होने की बात चर्चा में सुनी जा रही है। हालांकि कुछ दिन पूर्व ही एक बैठक के दौरान स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के मंत्री जयंत मलैया निर्माण में होने वाली लापरवाही के संबध में संकेत दे चुके हैं। 
कहां क्या-जायें तो जायें कहां ?-
घंटाघर पर गुजरात स्वीट्स के सामने लगा बोर्ड बस स्टेण्ड की ओर जाने का संकेत दे रहा है जबकि यह मार्ग जबलपुर नाका की ओर जाता है। रामकुमार विद्यालय के समीप स्थित सुलभ शौचालय के समीप लगा बोर्ड जिस ओर दमोह सिटी का ईशारा कर रहा है वहां कोई मार्ग ही नहीं है हां उस दिशा में बस स्टेण्ड,न्यायालय स्थित है। उसी के ठीक सामने लगा बोर्ड कुछ ओर कहानी कहता है तो थोडे से ही आगे का कुछ ओर जिसके चलते लोग यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि आखिर जायें तो जायें कहां? शहर में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर एमपीआरडीसी द्वारा अधिकारियों के भ्रमण एवं कार्य पर निगरानी की बात कही जाती है परन्तु कितना क्या हो रहा है यह लगातार चर्चाओं में होने के साथ प्रश्न चिंह अंकित करते सुना जा सकता है? प्राप्त जानकारी के अनुसार सागर संभाग में श्री अरोरा कार्य देख रहे हैं तो वहीं दमोह का प्रभार श्री कीर को दिया गया है परन्तु दोनो का कब आना जाना होता है यहां किसी को नहीं पता? हां यहां के कुछ स्थानीय चर्चित ठेकेदार पर विशेष कृपा होने तथा ठेकेदारों द्वारा मंदिर में प्रसाद स्वरूप समय-समय पर चढावा होने की लगातार चर्चा सुनी जा सकती है? 
मार्ग-बोर्ड पर क्यों नहीं नजर-
नगर के मध्य ही प्रमुख क्षेत्रों में ही यह हाल है तो फिर अन्य जगहों पर क्या हो रहा होगा या किया जा रहा होगा? यहां लगातार प्रश्र उठता है कि कई दिन पूर्व लगाये गये इन संकेत बोर्डों पर किसी अधिकारी की नजर क्यों नहीं गयी? नगर पालिका अध्यक्ष एवं उनका अमला लगातार भ्रमण की बात करता है?वहीं जिले के मुखिया हों या फिर उनके अधिनस्थ अधिकारी कर्मचारी यही हाल इनका भी है? मामला जो भी हो पर उक्त घोर लापरवाही का खामियाजा वह भोग रहे हैं जो रात्रि के समय किसी अन्य शहर से यहां आते हैं और भ्रमित हो यहां वहां भटकने का दंश झेलने पर मजबूर हो जाते हैं?

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