श्रीहनुमत महायज्ञ में हो रहा रूद्री निर्माण

श्रीहनुमत महायज्ञ में हो रहा रूद्री निर्माण धर्म गंगा में गोत लगा रहे श्रृद्धालु सिविल वार्ड पंच मुखी हनुमान मंदिर में भक्तों की भारी भीड दमोह/ विश्व शांति,मानव कल्याण एवं राष्ट्र की मजबूती, समद्धशाली होने के पवित्र उद्ेश्य को लेकर 1008 श्रीहनुमत महायज्ञ में लगातार भक्तों की भारी भीड उमड रही है। जहां एक ओर वेद मंत्रों के एक साथ होते उच्चारण एवं यज्ञ मंडप से उठती ज्वालायें तथा उनसे निकलने वाले धुयें से क्षेत्र का सारा वातावरण जहां धर्ममय बना हुआ है तो वहीं दूसरी ओर प्रदूषित वायुमंडल की शुद्धिकरण का भी कार्य चल रहा है। स्थानीय सिविल वार्ड में पंच मुखी हनुमान मंदिर में जहां चल रहे श्री हनुमत महायज्ञ में हजारों श्रृद्धालु अपनी सहभागिता निभा रहे हैं। ज्ञात हो कि जिले में लगातार बहने वाली धर्म की गंगा रूपी धारा में लगातार भक्त गोते लगाते हुये अपने मानव जीवन को सफल करने का प्रयास कर रहे हैं। सनातन धर्म में यज्ञ,हवन,व्रत का विशेष महत्व बतलाया गया है जिसके धार्मिक एवं वैज्ञानिक दोनों प्रकार के महत्वों को भी बतलाया जाता है। प्रति दिन प्रात: निर्धारित समय से महायज्ञ में भगवान हनुमंत लाल का विधि विधान से पूजनार्चन के साथ उक्त धार्मिक कार्य प्रारंभ हो जाता है। यज्ञाचार्य पं.महेद्र गर्ग एवं उनके सहायक पं.आशीष कटारे के नेतृत्व में चल रहे उक्त धार्मिक आयोजन में बडी संख्या में विद्वान विप्र अपनी सहभागिता कर रहे हैं तो वहीं जिले भर के विभिन्न क्षेत्रों से पधारे श्रृद्धालू भाग ले रहे हैं। रूद्री निर्माण के साथ संकीर्तन- सिविल वार्ड में सिद्ध पंचमुखी हनुमान मंदिर में चल रहे तृतीय 1008 हनुमत महायज्ञ में जहां पाठ,आहुतियों देने का क्रम जारी है तो वहीं रूद्री निर्माण का क्रम भी जारी है। निर्धारित समय पर बडी संख्या में श्रृद्धालु उपस्थित होकर मिट्टी के शिव लिंग अर्थात् रूद्री निर्माण करने में लगे हुये देखे जा सकते हैं। प्रतिदिन इस प्रांगण में चल रहे संकीर्तन में सहभागिता के साथ ही भक्त धर्म लाभ ले रहे हैं। जिले के विद्वान विप्रों के द्वारा पूर्ण विधि-विधान के साथ धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण कराया जा रहा है। ें प्रधान शक्ति पीठ सहित देवों की स्थापना- उक्त श्री हनुमत महायज्ञ के पवित्र धार्मिक आयोजन स्थल पर धार्मिक एवं वास्तु को दृष्टिगत रखते हुये पीठों सहित वेदों के द्वारों को बनाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रधान पीठ में सर्वोतोभद्र मण्डल स्थापित किया गया है जिसमें श्रीराम दरबार विराजमान है। इनके साथ ही 57 देवताओं को यहां स्थान दिया गया है। योगिनी पीठ में महाकाली,महा सरस्वती एवं महालक्ष्मी के साथ ही 64 देवियों को स्थापित किया गया है। इसी क्रम में नैऋत्य कोण में वास्तु पीठ सहित 64,वायव्य कोण में क्षेत्रपाल सहित 49,ईशान कोण में नवग्रह पीठ के साथ 47 देवताओं को विराजमान कराया गया है। चार द्वार बनाये गये हैं जिसमें पूर्व ऋगवेद,दक्षिण यजुर्वेद,पश्चिम सामवेद और उत्तर में अर्थवेद को बनाया गया है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अन्नदाता को खून के आॅंसू नहीं रोना पड़ेगा - प्रहलाद सिंह पटेल

नाना साहबपानसे स्मृति कार्यक्रम उचित गरिमा मिलनी चाहिए -प्रहलाद पटेल