राज्य सूचना आयुक्त ने दमोह में लगाई अदालत

अपील के 14 प्रकरणों पर की सुनवाई दमोह/ सूचना का अधिकार में दिये गये प्रावधानों एवं कानून की मंशा को पूर्ण कराने के उदेश्य को लेकर आज स्वयं अदालत अपीलार्थियों के दरवाजे पहुंची अगर एैसा कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। स्थानीय कलेक्ट्रेड में नगर दण्डाधिकारी के न्यायालय में एक अदालत को राज्य सूचना आयोग ने भी लगाया जहां उन्होने जिले के एैसे प्रकरणों को सुना जो उत्तरवादियों से पीडित हो न्याय मांगने के लिये भोपाल पहुंचे थे लेकिन महत्वपूर्ण बात यह देखने को मिली की न्याय देने वह स्वयं प्रार्थियों के गृह नगर में पहुंचे। पुकार के साथ आरोपी-फरियादी के मध्य अपने पक्ष को रखना लगातार जारी रहा। प्रकरणों की सुुनवाई कर रहे राज्य सूचना आयोग के आयुक्त जय किशन शर्मा दमोह की एडीएम कोर्ट कक्ष में द्वितीय अपील के 14 प्रकरणों पर सुनवाई की। तर्कों से सहमत-असहमत- प्रकरणों की सुनाई के दौरान अनेक अवसर इस प्रकार के देखने मिले जब तर्कों से सहमति एवं असहमति का दौर चला एक उर्जा विभाग के मामले को लेकर कंपनी की ओर से आये अधिवक्ता के तर्कों को सुनते हुये कहा कि सूचना का अधिकार सबके लिये है। व्यापार वाणिज्य गोपनियता की बात कर मामले को गुमराह नहीं किया जा सकता अधिवक्ता द्वारा अपने विभाग के समर्थन में दिये गये तर्कों पर माननीय आयुक्त ने लगातार असहमति व्यक्त की। आयुक्त श्री शर्मा ने कहा की प्रार्थी का जानकारी प्राप्त करना अधिकार है इसलिये उसको जानकारी प्रदान करें। डा.गौतम को जुर्माने के लिये नोटिस- जिले के की ही स्वास्थ्य विभाग के एक प्रकरण की सुनवाई करते हुये माननीय आयुक्त ने प्रार्थी पत्रकार डा.एल.एन.वैष्णव के तर्को पर सहमति जताते हुये संबधित के विरूद्ध शास्ति अधिरोपित करने तथा नि:शुल्क जानकारी के पैसों की भरपाई तय करने की बात को माना। विदित हो कि डा.वैष्णव ने गत 22 अगस्त 2014 मेंसंविदा स्टाफ नर्सों से संबधित जानकारी को विधि अनुसार मांगा था। उक्त प्रकरण में अपना पक्ष रखते डा.बडोनिया ने यह कह कर बचने का प्रयास किया कि मामला मेरे समय का नहीं है एवं जानकारी नि:शुल्क अभी प्रदाय कर दी है। डा.वैष्णव ने अपने पक्ष में कहा की कानून की जानकारी न होना एवं जानकारी होते हुये भी पालन न करना दोनो स्थिति में संबधित को उक्त पद के लिये अयोग्य सिद्ध करती हैं। चूक के लिये दोषी न तो शासन है न प्रशासन एवं न ही कानून यहां व्यक्ति दोषी है तो फिर उसके विरूद्ध पच्चीस हजार रूपये की शास्ती अधिरोपित की जाये नि:शुल्क जानकारी का भुगतान उसके वेतन से किया जाये। डा.वैष्णव के समस्त तर्कों से सहमत होते हुये आयुक्त श्री शर्मा ने तत्कालीन सीएमओएच डा.ओपी गौतम को नोटिस जारी करने के निर्देश जारी करने का लेख किया। इन प्रकरणों में हुई सुनावाई- पंचायत एवं ग्रामीण विकास दमोह के अपील प्रकरण नम्बर ए-2870/14 के अपीलार्थी धर्मेन्द्र कुमार भट्ट, ए-286/14 विजय शंकर पाण्डे, ए-1860/14 सुधीर मिश्रा, ए-2785/14 भूपेन्द्र सिंह लोधी, ए-2563/14 पुष्पेन्द्र जैन तथा अपील प्रकरण नम्बर ए-2329/14, ए-2331/14, ए-2330/14 के अपीलार्थी शंकरलाल सोनी है। लोक सूचना अधिकारी ऊर्जा विभाग के अपील प्रकरण नम्बर ए-2510/14 डी.एस.ताम्रकार, लोक सूचना अधिकारी लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के अपील प्रकरण नम्बर ए-2509/14 शेख रसूल, ए-2797/14 डॉ.एल.एन.वैष्णव, लोक सूचना अधिकारी कृषि विभाग दमोह के अपील प्रकरण नम्बर ए-1877/14 दिवाकर करमरकर विजय, लोक सूचना अधिकारी वन विभाग के अपील प्रकरण नम्बर ए-2508/14 शेख रसूल तथा लोक सूचना अधिकारी स्कूल शिक्षा दमोह के अपील प्रकरण नम्बर ए-2859/14 के अपीलार्थी भारत चौबे के प्रकरणों को सुना।

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