मीडिया-मीसा,भाजपाई और गणतंत्र समारोह
मीडिया-मीसा,भाजपाई और गणतंत्र समारोह
गणतंत्र समारोह में उपेक्षा का मामला
डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/ राष्ट्र के इतिहास का शायद यह प्रथम अवसर होगा जब मीडिया एवं मीसा दोनो को बैठालने की जगह में कमी पड गयी हो और इनको अंग्रिम पंक्ति से उठाकर पीछे एक सामान्य व्यवस्था कर अपने कर्तव्य की इतिश्री करने का प्रयास किया हो? जी हां एैसा ही कुछ हुआ था दमोह जिला मुख्यालय पर आयोजित राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के अवसर जिसकी चर्चा लगातार हो रही है। भले ही भाजपा के शीर्ष में बैठे नेता मीसा बंदियों के त्याग और बलिदानों की गौरव गाथा को मंच से गाकर तालियां बटोरते हों परन्तु स्थानीय स्तर पर शायद जो देखने मिला वह मीसा बंदियों की पीडा को दर्शा रहा था। जिलाध्यक्ष श्री खरे तो इस कदर आहत देखे गये कि उन्होने इसकी शिकायत प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी,भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह एवं प्रदेश के मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान से करने की पूरी तैयारी कर ली है। उनको सम्मान जनक बैठने के स्थान न होने आमंत्रण पत्र के कार्यक्रम में मीसा बंदियों के उल्लेख न होने एवं स्थानीय मंत्री के न मिलने की बात को लेकर वह आहत बतलाये जाते हैं।
प्रेस को नियम-
भले ही देश के प्रधान मंत्री,मुख्यमंत्री तथा पार्टी संगठन के उच्च पदों पर बैठे नेता प्रेस के महत्व को स्वीकारते हुये उसको सम्मान देते हों। भले ही प्रेस ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में स्वंय को स्थापित करते हुये अपना स्थान बनाया हो और इसको तीनो स्तम्भ स्वीकरते हों? परन्तु स्थानीय स्तर गणतंत्र दिवस के समारोह में तो कम से कम इसके विपरीत देखने मिला? बतलाया जाता है कि प्रेस के अनेक लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पडा? निर्धारित स्थान और नियमों को पालन करते हुये या तो पत्रकारों ने अपना कार्य किया या फिर अधिकांश ने समारोह स्थल पर प्रवेश करना ही उचित नहीं समझा? ज्ञात हो कि देश के इतिहास का यह प्रथम अवसर था जब राष्ट्रीय पर्व पर प्रेस के साथ भी एैसा किया गया हो?
भाजपाईयों का कब्जा कव्हरेज पर धमकी-
उक्त समारोह के दौरान की गयी बैठक व्यवस्था कुछ भाजपाईयों ने सत्ता के मद में चूर होने का स्पष्ट्र परिचय दिया अगर एैसा कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी? ज्ञात हो कि गणतंत्र दिवस के समारोह में सामने की ओर सोफा लगाये गये थे जिसमें पट्टी लगाकर स्थान आरक्षित किया गया था। यहां कृषि मंडी,जनपद,जिला पंचायत के अध्यक्ष उपाध्यक्षों के साथ ही पूर्व विधायक एवं न्यायाधीशों के लिये स्थान आरक्षित किया गया था। उक्त स्थानों पर नेताओं ने जबरन अपना कब्जा तो किया ही साथ ही मीडिया की ओर से कव्हरेज करने वाले को गाली और धमकी देने का कार्य भी किया। हालांकि यह सब केमरे में कैद भी हो गया।
सुरक्षाकर्मियों से झडप-
भाजपा के चर्चित नेताओं ने प्रवेश के नियमों को तोडने के मामले को लेकर सुरक्षाकर्मियों से जमकर बहस की तथा सत्ता का रौब झाडा जिसको लेकर पंडाल में चर्चाओं का दौर जारी रहा?
मंत्री ने नहीं दिया महत्व,नेताओं के चेहरों से उडा रंग-
हालांकि अग्रिम पंक्ति में जबरन कर बैठे चर्चित नेताओं को समारोह के मुख्यातिथि मंत्री जयंत मलैया ने भी महत्व नहीं दिया। इस दौरान इन भाजपाईयों के चेहरों के रंग को उडते आसानी से देखा जा सकता था जिसको लेकर पंडाल में चर्चा होती रही?विदित हो कि समारोह में परंपरा के अनुसार मुख्यातिथि शुभकामनायें देने और लेने गणमान्य नागरिकों,जनप्रतिनिधियों के पास स्वयं जाते हैं।
व्यवस्थाओं को लेकर उपजते प्रश्र-
ृ1-उक्त समारोह में गत कई दशकों से की जाने वाली बैठक व्यवस्था को किसके कहने तथा निर्देश पर बदला गया?
2-प्रवेश और सुरक्षा को लेकर अचानक बदले गये नियम में आखिर एैसे क्या कारण रहे?
3-उक्त समारोह के लेकर की गयी व्यवस्था एवं उसमें बदलाव को लेकर क्या जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों को जानकारी थी?
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