धर्म,धरना,प्रदर्शन के साथ एक शाम...के नाम कुर्बान होती सडकें लापरवाह प्रशासन,खामोश जनप्रतिधि,परेशान नागरिक ( डा.एल.एन.वैष्णव)
( अनदेखी )-
दमोह/ सडकें क्षेत्र की धमनी एवं शिराओं के रूप में कार्य करती हैं जैसे इनके स्वस्थ होने पर रक्त का संचार सही प्रकार के बिना अवरोध के शरीर में होता है वैसा ही किसी एक जगह से दूसरी जगह बिना व्यवधान के आने जाने में स्वच्छ एवं अच्छी सडकों का भी योगदान कहा जा सकता है। बात करें अगर भारत सरकार की या फिर राज्य सरकार की तो इस बात से इंकार नहीं ेिकया जा सकता कि अरबों रूपयों की लागत से लगातार इनका निर्माण कार्य हो रहा है। परन्तु क्या यह स्वच्छ एवं स्वस्थ रह पा रही हैं तो कम से कम दमोह नगर में तो प्रश्न उपजते देखा जा सकता है। निर्माण के मामले में हो या फिर विधवंश के मामले में जिसके अनेक उदाहरण आपको मिल जायेंगे?
कुर्बान होती सडकें-
सडकों की कुर्बानी का सिलसिला नगर में लगातार जारी है कभी धर्म के नाम पर तो कभी नेताओं की रैलियों के नाम पर तो कभी एक शाम .....के नाम पर देखा जाये तो शामत सडकों की आ रही है? पैसा सरकार यानि जनता का और मजे लूटने के लिये कुछ लोग? जहां देखो वहीं खूंटा गाडो पाईप,पंडाल लगाओ और बस हो जाओ शुरू न कोई पूछने वाला न कोई टोकने वाला क्योंकि अंधेर नगरी चौपट राजा की कहावत तो सभी को मालूम है न ?
मानस भवन फिर सडक क्यों-
शहर के मध्य एक वृहद मानस भवन स्थापित है जो कि आधुनिक रूप से सुसज्जित है। वहीं दूसरी ओर कुछ और भी क्षेत्र हैं जो एक बडे मैदान हैं एवं हाल ही में एक आधुनिक भवन को जटाशंकर में भी बनाया गया है। लेकिन हम तो जो भी करेंगे सडकों पर ही खूंटा गाडकर करेंगें? और प्रशासन एवं जनप्रतिधि हम तो खामोश देखेंगे?
उपजते प्रश्र-
नगर के मध्य लगातार हो रहे सडकों पर अत्याचारों को लेकर एवं नागरिकों को होने वाली असुविधाओं को लेकर तथा प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों की खामोशी को लेकर प्रश्र सुने सकते हैं? यहां हम किसी धर्म,राजनैतिक दल या फिर समाजिक संगठन की बात नहीं कर रहे हैं? यहां तो सिर्फ वैसी होड लगी देखी जा सकती है कि तेरी साडी मेरी साडी से सफेद कैसे? और फिर शुरू होता है सडकों पर दे दनादन? विचारणीय प्रश्र तो यह है कि यहां अधिकारी, नेता सब आते जाते हैं चाहे वह कार्यक्रम का लुफत उठाने हो या फिर मार्ग से निकलने केलिये पर सभी का धृतराष्ट्र बनना तो चर्चा में होगा ही न? बात करें राजनैतिक दलों की तो वह एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगायेंगे पर कार्य वही करेंगे?
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