खाली समय अनकट डायमंड की तरह-न्यायाधीश तारकेश्वर सिंह गायत्री परिवार के युवा चेतना शिविर में वक्ताओं ने रखे विचार

दमोह/ खाली समय एक अनकट डायमंड की तरह जिसका अगर उपयोग किया जाये तो कीमती हीरे की शक्ल ले सकता है अन्यथा कांच तो है ही यह बात विशेष न्यायाधीश तारकेश्वर सिंह ने कही। स्थानीय गायत्री शक्ति पीठ में आयोजित युवा चेतना शिविर में उपस्थित युवाओं,गणमान्य नागरिकों एवं मातृ शक्ति को संबोधित करते हुये श्री सिंह ने अनेक विचारणीय प्रश्नों को सबके सामने रखते हुये चिंतन करने विवश कर दिया। इन्होने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि जो व्यक्ति एक हजार बर्ष में नहीं कर सकता वह श्रीराम शर्मा आचार्य ने अपने जीवन में कर दिखलाया। श्री सिंह ने कहा कि हमें अपनी सभ्यता एवं संस्कृति के बेहतर उदाहरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता है न कि किसी दूसरे पर आक्षेप लगाने की। एक उदाहरण के रूप में इन्होने कहा कि गंदा जल की निकासी सही ढंग से हो यह सभ्यता हुई जबकि यह कहां गिराया जाये यह संस्कृति है। गीता के एक श्लोक को प्रस्तुत करते हुये कहा कि भगवान श्रीकृष्ण स्वयं को पानी की मिठास बतलाते हैं तो क्या कृष्ण के वह सच्चे भक्त हैं जो नदियों सरोवरों को गंदा करते हैं? इन्होने कहा कि जीवन एक अनंत यात्रा की तरह है समझ में तब आता है जब हम होश संभालते हैं। युवाओं को अपने विचारों एवं सकारात्मक दिशा में कार्य करने के लिये इन्होने अनेक उदाहरण प्रस्तुत किये। युवा चेतना शिविर का शुभारंभ- उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ मां गायत्री के समक्ष दीप प्रज्जवलन पूजनार्चन के साथ मशाल का पूजन कर मुख्यातिथि विशेष न्यायाधीश तारकेश्वर सिंह,अध्यक्ष पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह एवं पीडी परते सहायक उप जोन प्रभारी,व्यवस्थापक पंकज हर्ष श्रीवास्तव एवं मंचासीन अतिथियों ने किया। ज्ञात हो कि अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार द्वारा बर्ष 2016 को युवा क्रांति बर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। इसी पवित्र उद्ेश्य के तहत उक्त शिविर का आयोजन किया गया था। किसने क्या कहा- आयोजन की प्रशंसा करते हुये कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पुलिस अधिक्षक तिलक सिंह ने कहा कि इससे युवाओं को कुछ सीखने मिलेगा। इन्होने कहा कि युवाओं को तराशने की आवश्यकता है उम्र ही एैसी होती है कि वह भटकेगा परन्तु हमें यह ध्यान रखना है कि वह छलांग पडोसी के घर में नहीं अपितु खेल ेके मेदान में लगाये। डा.छबिनाथ तिवारी ने अपने चिरपरिचित अंदाज में संबोधित करते हुुये कहा कि हम मनुष्य के साथ मंगना हो गये हैं आचरण निरंतर संशोधन की अपेक्षा रखता है। वहीं कार्यक्रम का संचालन कर रहे पंकजहर्ष श्रीवास्तव ने कहा कि कालनेमी हर जगह मौजूद हैं उसका कार्य हर अच्छे कार्य में व्यवधान पैदा करना है। युवाओं को सजग एवं सचेत होकर राष्ट्र के लिये कार्य करने के लिये आगे आना होगा। ठा.नारायण सिंह ने कहा कि युवा वर्तमान में संकर्मण काल से गुजर रहा है। नरेन्द्र दुबे ने कहा कि अन्न का कण एवं संत का सत्संग व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिये। युवा कौन ?- शिविर में गायत्री पविार के प्रशिक्षण टोली के प्रफुल्ल सोनी,विश्वजीत ने गायन एवं उद्बोधन के माध्यम से संदेश दिया। इन्होने कहा कि युवा वह है जो कि सदैव क्रियाशील हो एवं जोश के साथ होश में रहता हो। युवा वह जो काल की चाल को बदल दे एवं जिसको दुर्बलता से लगाव न हो। युवा वह जो कि जिसका विषम से विषम परिस्थिति में भी मनोवल न गिरे।

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