शंख,घडियालों की पवित्र धुन के साथ मां क्षिप्रा की आरती
शंख,घडियालों की पवित्र धुन के साथ मां क्षिप्रा की आरती
सिंहस्थ में उमड रही लाखों भक्तों की भीड,धर्ममय बना वातावरण
डा.हंसा वैष्णव
उज्जैन/ 12/05/2016सिंहस्थ कुंभ में लाखों भक्तों की भीड तथा संध्या के समय होने वाली मां क्षिप्रा की आरती का दृश्य जहां एक अलग अनुभूति कराता है तो वहीं धर्म की पवित्र गंगा में गोते लगा लोग अपने आपको धन्य मान रहे हैं। संध्या के लगभग चार बजे से ही बडी संख्या में भक्त यहां घाटों पर बनी सीढियों पर अपना स्थान सुरक्षित करने लग जाते हैं। इस दौरान कौन कहां से आया है किसके परिवार कितने सदस्य हैं के साथ अपने अनुभवों को एक दूसरे साझा करने का अवसर का लाभ भी उठाते रहते हैं। जैसे ही संध्या के समय मंदिरों घाटों पर लगी आर्कषक लाईटें जलती हैं मानों सारा वातावरण एवं धर्म के रंग में रंगीन हो जाता है लोगों के उत्साह का ठिकाना नहीं रहता है। ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के उज्जैन में सनातन धर्म का एक महान पर्व कुंभ का आयोजन चल रहा है जहां सारे विश्व के लोग यहां आ रहे हैं। लाखों भक्तों का प्रतिदिन आना जाना जारी है,शाही स्नान के दिनों में इसकी संख्या बढ जाती है। साधु-संयासियों के अखाडे में ही लाखों की संख्या में स्थाई आर्थात् पूरे कुंभ की अवधि के लिये निवास बनाये हुये हैं। प्रतिदिन जहां लोग डुबकी लगा रहे हैं तो वहीं मां क्षिप्रा की आरती में सहभागिता कर रहे हैं। शंखों घडियालों की पवित्र धुन के साथ लोगों की तालियां भी एक अलग आनंद की अनुभूति कराती है। लगभग एक घंटे से अधिक चलने वाली उक्त धार्मिक प्रक्रिया में धर्म गंगा स्वयं भक्तों को अपना आर्शीवाद दे रही हों एैसा भक्तों को महसूस होने के अनुभव को लोग बतलाते हैं। धर्म के साथ सामाजिक समरसता का एक पवित्र उदाहरण यहां देखने को मिलता है। यहां आये अनेक वर्ण के लोगों ने चर्चा के दौरान बतलाया कि हम सभी एक ही धर्म के हैं सभी हिन्दु भाई बहिन हैं। आंन्ध्र प्रदेश से आये एक दंपत्ति ने अपने अनुभव बतलाये तो वहीं उडिसा से आये हुये एक परिवार ने बतलाया कि भगवान का आर्शीवाद लेने आये हुये हैं। इसी क्रम में आसाम और नेपाल से आया हुआ परिवार कहता है कि भगवान के दर्शन के साथ साधु संतो का आर्शीवाद भी लिया है। घाट पर आरती के दौरान उपस्थित बडी संख्या में महिला पुरूषों ने कहा कि लगभग प्रत्येक पंडाल में साधु-संत स्वयं स्वादिष्ट भोजन करा रहे हैं किसी प्रकार की समस्या नहीं है। बैंगलुरु से आये अतुल्य दुबे ने कहा कि इतने व्यापक स्तर पर प्रकृति की पूजा देखने का यह मेरे जीवन का पहला अवसर है।



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