विशेष समाचार -सिंहस्थ कुंभ
विशेष समाचार
धर्म,संस्कृति,आस्था,विश्वास,सामाजिक समरसता का संगम
- सिंहस्थ कुंभ में लाखों श्रृद्धालुओं की प्रतिदिन सहभागिता
- महाकाल के जयकारों के साथ मां क्षिप्रा की आरती
- 6 जोन 22 सेक्ट्रर में बांटा गया सिंहस्थ को 16 सेक्टर में मेला
डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव
उज्जैन / बाबा महाकाल के जयकारों से गुंजायमान होते मार्ग,वेद मंत्रों के साथ विशाल पंडालों में भगवत कथा रूपी अमृत का पान करते भक्त तथा शंखों ,घडियालों की पवित्र धुन के मध्य मां क्षिप्रा की महा आरती में सहभागिता करते लाखों लोग जी हां एैसा नजारा पिछले कई दिनों से मध्यप्रदेश के उज्जैन में बना हुआ है। ज्ञात हो कि विश्व के सबसे बडे मेले का आयोजन इस समय चल रहा है जिसको सिंहस्थ के नाम से पहचाना जाता है जिसमें किसी आमंत्रण तथा भेदभाव के लाखों लोगों का आना-जाना होता है। आस्था,धर्म,विश्वास के साथ सामाजिक समरसता का संदेश देने वाले इस महापर्व के दौरान सभी वर्ग समुदाय के लोग एक साथ उपस्थित हो स्नान,ध्यान,यज्ञ,हवन,पूजन,दान करते हैं तो बिना किसी भेदभाव के एक दूसरे के साथ एैसे हिलते मिलते देखे जा सकते हैं जैसे किसी दूध में शक्कर को मिला दिया जाता है। विश्व में इससे बडा सामाजिक समरसता का उदाहरण कहीं किसी भी देश में भारत को छोड कर नहीं मिल सकता है। जिसके शोध एवं जानकारी लेने के लिये विश्व के बडे-बडे वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता इस पर कार्य कर चुके हैं एवं करने जा रहे हैं। कुंभ जो कि धार्मिक,वैज्ञानिक एवं सामाजिक समरसता का सबसे बडा आधार बतलाया जाता है स्कन्द पुराण के अनुसार इसको प्रतिकल्पा नाम से भी संबोधित किया गया है जो सृष्ट्रि के आरंभ से इसकी उत्पत्ति का प्रतीक बतलाया जाता है। सनातन धर्म का यह महान पर्व 12 बर्ष में एक बार आता है जब करोडों श्रृद्धालु मध्यप्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी में स्नान हेतु एकत्रित होते हैं। धार्मिक मनातनुसार जब सूर्य मेष एवं बृहस्पति सिंह राशि में होते हैं तो उज्जैन में कुंभ प्रारंभ होता है। चैत्र माह की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर बैशाख पूर्णिमा के दिन अंतिम स्नान पर समाप्त होता है।
सिंहस्थ कुंभ मेला में 6 जोन 22 सेक्ट्रर-
उक्त विशाल आयोजन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने व्यापक स्तर पर तैयारियां की हैं जिसको अंतिम रूप देने का सिलसिला जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सिंहस्थ क्षेत्र को 6 जोन एवं 22 सेक्ट्रर में बांटा गया है जिसमें 16 सेक्ट्रर में मेला परिसर है। इस क्षेत्र में लगभग 15 लाख लोग स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं जिसमें 13 अखाडे भी हैं। मेला परिसर में लगभग 1000 से अधिक पेयजल की प्याऊ भी बनायी गयी हैं। वहीं मोबाईल एप्स के साथ अनुरोध,समस्या निवारण हेतु 106 हेल्प सेंटर भी बनाये गये हैं। विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारियों की ड्यूटी इस दौरान लगायी गयी है। प्राप्त जानकारी अनुसार 22 विभागों द्वारा सेवायें दे रहे हैं ।
उज्जैयिनी और चौरासी शिव-
प्राचीन एवं धार्मिक रूप से पहचानी जानी वाली उज्जयिनी नगरी का महत्व जहां ज्ञान,विज्ञान,अध्यात्म,कला को लेकर पहचाना जाता है तो वहीं दूसरी ओर यहां पर 84 शिव लिंग की स्थापना महाकाल के साथ होने और इसका अलग-अलग महत्व बतलाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां पर क्रमश:अगस्तेश्वर,गुहेश्ववर,ढुढेश्वर,डमरूकेश्वर,अनादिकलपेश्वर,स्वर्ण जालेश्वर,त्रिविष्टेश्वर,कपालेश्वर,स्वर्गद्वारेश्वर,कर्कोटकेश्वर,सिद्धेश्वर,लोकपालेश्वर,कामेश्वर,कुटुम्बेश्वर,इन्द्रद्युम्रेश्वर,ईशानेश्वर,अप्सरेश्वर,कलकलेश्वर,नागचके्रश्वर,प्रतिहारेश्वर,कुक्टेश्वर,कर्कटेश्वर,मेघनादेश्वर,महालेश्वर,मुक्तेश्वर,सोमेश्वर,अनरकेश्वर,जटेश्वर,रामेश्वर,च्वनेश्वर,खण्डेश्वर,पत्नेश्वर,आनदेश्वर,कन्थदेश्वर,इंद्रेश्वर,मार्कण्डेश्वर,शिवेश्वर,कुसुमेश्वर,अकेश्वर,कुण्डेश्वर,लुम्पेश्वर,,गंगेश्वर,अंगारेश्वर,उत्तरेश्वर,त्रिलोचनेश्वर,वीरेश्वर,नूपरेश्वर,अभयेश्वर,पृथुकेश्वर,स्थावरेश्वर,शूलेश्वर,ओंकारेश्वर,विश्वेश्वर,कंटेश्वर,ङ्क्षसहश्वर,रेवन्तश्वर,घंटेश्वर,प्रयागेश्वर,सिद्धेश्वर,मातंगश्वेर,सौभाग्येश्वर,रूपकेश्वर,धनु:सहास्त्रेश्वर,पशुपतेश्वर,ब्रम्हेश्वर,जलपेश्वर,केदारेश्वर,पिशाच मुक्तेश्वर,संगमेश्वर,दुर्घरेश्वर,प्रयोगेश्वर,चन्द्रादित्येश्वर,करमैश्वर,राजस्लेश्वर,बडलेश्वर,अरूणेश्वर,पुष्पदंतेश्वर,अविमुक्तेश्वर,हनुमंत्केश्वर,स्वप्रेश्वर,पिंगलेश्वर,कायावरोहलेश्वर,बिल्पेश्वर एवं दुर्दरेश्वर के मंदिर स्थापित हैं।
मां क्षिप्रा की आरती -
सिंहस्थ कुंभ में लाखों भक्तों की भीड तथा संध्या के समय होने वाली मां क्षिप्रा की आरती का दृश्य जहां एक अलग अनुभूति कराता है तो वहीं धर्म की पवित्र गंगा में गोते लगा लोग अपने आपको धन्य मान रहे हैं। संध्या के लगभग चार बजे से ही बडी संख्या में भक्त यहां घाटों पर बनी सीढियों पर अपना स्थान सुरक्षित करने लग जाते हैं। इस दौरान कौन कहां से आया है किसके परिवार कितने सदस्य हैं के साथ अपने अनुभवों को एक दूसरे साझा करने का अवसर का लाभ भी उठाते रहते हैं। जैसे ही संध्या के समय मंदिरों घाटों पर लगी आर्कषक लाईटें जलती हैं मानों सारा वातावरण एवं धर्म के रंग में रंगीन हो जाता है लोगों के उत्साह का ठिकाना नहीं रहता है। ज्ञात हो कि मध्यप्रदेश के उज्जैन में सनातन धर्म का एक महान पर्व कुंभ का आयोजन चल रहा है जहां सारे विश्व के लोग यहां आ रहे हैं। लाखों भक्तों का प्रतिदिन आना जाना जारी है,शाही स्नान के दिनों में इसकी संख्या बढ जाती है। साधु-संयासियों के अखाडे में ही लाखों की संख्या में स्थाई आर्थात् पूरे कुंभ की अवधि के लिये निवास बनाये हुये हैं। प्रतिदिन जहां लोग डुबकी लगा रहे हैं तो वहीं मां क्षिप्रा की आरती में सहभागिता कर रहे हैं। शंखों घडियालों की पवित्र धुन के साथ लोगों की तालियां भी एक अलग आनंद की अनुभूति कराती है। लगभग एक घंटे से अधिक चलने वाली उक्त धार्मिक प्रक्रिया में धर्म गंगा स्वयं भक्तों को अपना आर्शीवाद दे रही हों एैसा भक्तों को महसूस होने के अनुभव को लोग बतलाते हैं। धर्म के साथ सामाजिक समरसता का एक पवित्र उदाहरण यहां देखने को मिलता है।
प्रदर्शनियों से मिल रही है जानकारी-
सिंहस्थ के विशाल मेला क्षेत्र में धार्मिक पंडालों के साथ विभिन्न राज्यों,सरकारी विभागों ने प्रदर्शनी और पंडाल लगाए हैं। श्रद्धालुओं को प्रदर्शनियों के माध्यम से कई उपयोगी जानकारी दी जा रही है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रदर्शनियों में पहुँच रहे हैं। इन पंडालों में जहां भारतीय संस्कृति के साथ ही भारत सरकार एवं प्रदेश सरकार की अति महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारियां भी दी जा रही है। यहां आने वाले श्रृद्धालु लगातार जानकारियां प्राप्त कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर भारत सरकार द्वारा पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के स्टाल में पाँच करोड़ निर्धन परिवारों को उज्जवला योजना में रसोई गैस कनेक्शन दिये जायेंगे। योजना के बारे में श्रद्धालुओं को विस्तार से जानकारी दी जा रही है। छत्तीसगढ़ के पांडाल में छत्तीसगढ़ में पिछले 12 साल में हर क्षेत्र में हुई तरक्की को दर्शाया गया है। झारखण्ड ने अपने स्टाल पर धार्मिक स्थलों की जानकारी दी है। झारखण्ड की वन संपदा, पेंटिग और वहाँ की लोक कला को आकर्षक चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। इसी क्रम में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय भोपाल के स्टाल में भारतीय ज्ञान परम्परा को पेनल्स के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। हिन्दी भाषा के गौरवशाली इतिहास के बारे में भी जानकारी दी गई है।
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