खेल मैदान या फिर सरोवर,गंदगी,बदबू से जनता परेशान
शासन,प्रशासन,पार्षद सब सोये,गंदा शहर से कैसे मिले निजात
( डा.हंसा वैष्णव )
दमोह/03/04/2016-- जल संकट का सामना लम्बे समय से कर रहे दमोह नगर में यूं तो अनेक तालाब हैं परन्तु इनका लाभ जनता को अब उतना नहीं मिल पा रहा है जितना मिलना चाहिये। शहर के एकदम मध्य स्थित दीवानजी की तलैया के नाम से पहचानी जाने वाले तालाब की स्थिति एकदम दयनीय बनी हुई है। गंदगी का यह आलम है कि इसको देखकर सामान्यत: कोई यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि यह तालाब है प्रथम दृष्ट्रि में एक खेल मैदान जैसा दिखलाई देता है। प्राचीन सरोवर को चारों ओर से अतिक्रमणकारियों ने अपने दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले गंदे जलों के मार्ग इसमें जोड रखे हैं तो इसी क्रम में अनेक जगहों पर शौचालयों के पाईप भी जुडे होने की बात सामने आयी है। दीवान जी की तलैया का अपना एक अलग महत्व बतलाया जाता है निर्माण से लेकर अपने अस्तित्व की लडाई लड रही यह तलैया हिन्दुओं एवं मुस्लमान दोनो के मध्य एक कौमी एकता का प्रतीक भी मानी जाती है। यहां एक श्रृद्धालू मां भगवती का प्रतीक जवारों के साथ ही कजलियों का विर्सजन करते हैं तो दूसरी ओर ताजिया ठंडे किये जाते हैं। हाल ही में इसकी गंदगी को लेकर मां भगवती के भक्तों का गुस्सा जमकर फूट था जिसको अपने शब्दों के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के साथ नगरपालिका की कार्य प्रणाली पर प्रश्र चिंह अंकित किये थे?
नपा ने जोडा गंदा नाला-
उक्त तालाब में एक वार्ड के गंदे नाले को जोड इसमें लगातार सारे वार्ड की गंदगी डालने का कार्य वही विभाग कर रहा है जिसके जिम्मे साफ-सफाई की जबाबदारी है। ज्ञात हो कि सिविल 02 इंदिरा कालोनी से एक बडे नाले का निर्माण करा दीवान जी की तलैया में जोडा गया है। जिस जमीन को पुलिस अपनी बतलाती है उसी की जमीन में से होकर नाले का निर्माण कराया गया है। नाला सिविल 03 के गंदे पानी का है और दीवानजी की तलैया सिविल 03 में स्थित है। विदित हो कि जिस नाले की हम बात कर रहे हैं उसको अप्रत्यक्ष रूप से तत्कालीन पार्षद विजय जैन ने बनवाया था। वहीं वर्तमान में इसी वार्ड से विजय जैन की पत्नि पार्षद हैं। यहां इस बात का उल्लेख कर देना आवश्यक हो जाता है कि गत बर्ष देश के सबसे गंदे शहरों की सूची में दमोह नगर सबसे उपर था। जिसको लेकर स्थानीय विधायक एवं प्रदेश के कदवर मंत्री जयंत मलैया को लेकर संपूर्ण देश में तथा मीडिया जगत में अनेक प्रश्रों का सामना करते हुये नीचा देखना पडा था जबकि जानकार बतलाते हैं कि यह जबाबदारी पार्षद,नपा की थी? परन्तु यहां तो नाला निर्माण में न तो आपत्ति दर्ज करायी गयी न ही एैसा कुछ जिसके चलते शहर नहीं अपितु वार्ड को तो गंदगी से मुक्त रखने में योगदान हो? यहां तो निर्माण के साथ ही जेब गर्म कैसे हो? जनता जाये भाड में पार्टी की छबि हो या मंत्री की यहां जो सब हम ही हैं? की तर्ज पर होने वाले कार्य से जनता लगातार प्रश्रों की झडी लगा रही है?
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