अध्यन के साथ आत्म विषलेषण करने पर जोर दें पत्रकार -सुरेश शर्मा

कलेक्ट्रर डा.शर्मा,एसपी श्री सिंह सहित वक्ताओं ने किया संबोधित
“मीडिया संवाद कार्यक्रम” प्रशिक्षण सम्पन्न
                              

                                                                                               डा.लक्ष्मीनारायण वैष्णव

दमोह/23-03-2017 संवाद जिसके सहारे किसी भी समस्या का समाधान हो सकता है तो वहीं अपनी बात कहने,सुनने सुनाने का माध्यम भी होता है। जिसको लेकर लगातार अनादिकाल से सफल प्रयोग होने के प्रमाण मिलते रहे हैं। फिलहाल हम बात कर रहे हैं मध्यप्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग के द्वारा आयोजित किये जा रहे “मीडिया संवाद” की जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिला मुख्यालय पर शासन-प्रशासन के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में प्रदेश के चुनिंदा पत्रकारों के माध्यम से स्थानीय पत्रकारों के मध्य अपनी बात कहने सुनने का प्रयास लगातार किया जा रहा है। इसके पीछे का उद्ेश्य सरकार के द्वारा किये जा रहे विकास एवं जनहितेषी योजनाओं की जानकारी के साथ पत्रकारों के हितों को लेकर सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों की जानकारी देना बतलाया जाता है। प्राप्त जानकारी के मीडिया संवाद को लेकर सरकार की मंशा साफ और स्पष्ट से रूप से यह दिखलायी देती है कि वह राज्य में अब तक हुये कार्य एवं भविष्य की योजनाओं को प्रभावी तरीके से मीडिया के माध्यम से जन तक पहुंचायी जा सके। जिला मुख्यालय पर आयोजित उक्त ”मीडिया संवाद ” के कार्यक्रम का शुभारंभ ज्ञान की देवी मां वीणापाणी के पूजनार्चन एवं दीप प्रज्जवल के साथ भोपाल से आये वरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा,गिरीश शर्मा,कलेक्टर डा.श्रीनिवास शर्मा,पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह,पत्रकार ठाकुर नारायण सिंह,नरेन्द्र दुबे ने किया। वहीं मंचासीन अतिथियों का जिला जनसंपर्क अधिकारी याशिक अहमद कुरैशी ने पुष्पहारों से किया तो मानवंदना शाल श्रीफल के द्वारा भी की गयी।

पत्रकारिता का स्वरूप बदला,विकास की ओर हमें चलना है-सुरेश शर्मा

जिन चार प्रमुख संस्थाओं की बात अक्सर होती है उनमें अगर देखा जाये तो सर्वोच्च स्थान प्रेस का है क्योंकि हम जनता के प्रति जबाबदेह हैं और बिना किसी सुरक्षा के अपने कर्तव्य को निभाते हैं यह बात बरिष्ठ पत्रकार सुरेश शर्मा ने कही। उन्होने कहा कि राजनीति का भी स्वरूप बदल रहा है, प्रशासनिक व्यवस्थाओं का भी स्वरूप बदल रहा है और आज तो न्यायिक व्यवस्थाओं का भी स्वरूप बदल रहा है, इसलिये हम पत्रकारों को जरूरी है सप्ताह में महीने में आत्म विषलेषण करना चाहिये। हमको अपने बारे में आत्म विषलेषण करना चाहिये कि हम कहा खड़े हैं।उन्होंने कहा जब कोई माननीय न्यायालय किसी गंभीर विषय पर अपना निर्णय देता है तो फिर बहुत दिनों तक प्रोटेक्शन में रहता है, पुलिस आसपास रहती है, जब कोई विधायिका ऐसा कानून पास कर देती है, तो बहुत दिनों तक प्रोटेक्शन में रहती है। केवल मीडिया ही ऐसा तंत्र है, ऐसा स्तंभ है जो रात में खतरनाक खबर लिखता है और दूसरे दिन अगली खबर के लिये जनता के बीच चला जाता है उसे कोई प्रोटेक्शन नहीं रहता। इसीलिये सबसे विश्वसनीय संस्था है वह मीडिया है। हम पत्रकार जनता के प्रति जबावदेह है। श्री शर्मा ने कहा कि पत्रकार क्या है इसके लिये शासन,प्रशासन में बैठे लोगों को समझना चाहिये। वीडियोग्राफर,फोटोग्राफर,टीव्ही न्यूज को पढने वाला और माईक पकडने वाला,टीव्ही न्यूज चेनल पर किसी विषय को लेकर शो करने वाला क्या पत्रकार है?जब वह स्वयं अपने आपको पत्रकार नहीं कहता तो आप क्यों इसको लेकर जबरन पत्रकारों से जोडते हैं? हम सबको अपने कर्म पर ध्यान देना है जिला प्रशासन के अधिकारियों के लिये खुश करना नहीं है हां वह हमारे लिये सम्मानीय हैं हम सबको सम्मान करना भी चाहिये लेकिन समाचारों में सत्यता,प्रमाणिकता के साथ प्रकाशन भी करना है। श्री शर्मा ने आजादी के समय की पत्रकारिता से लेकर वर्तमान की पत्रकारिता पर विस्तृत प्रकाश भी डाला। वहीं श्री शर्मा ने कहा कि अब हमें उस दिशा पर ध्यान देना और अधिक आवश्यक हो जाता है जिसको लेकर चारों बात चल रही है वह है विकास और जन कल्याणकारी कार्य। देश,प्रदेश और क्षेत्र में होने वाले सारे विकास कार्यों को जनता के मध्य समाचारों के माध्यम से ले जाने की जिम्मेदारी भी पूरी करने होगी। श्री शर्मा ने कहा कि यह चिंतन का विषय है कि प्रदेश में वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने वाला एक भी समाचार पत्र नहीं है। समाचार पत्र मालिकों ने नये रास्ते खोजना प्रारंभ कर दिये हैं एक बडे समाचार पत्र ने तो एक एजेंसी से सेवायें लेना प्रारंभ कर दिया है जिसमें भाडे पर पत्रकार लिये जायेंगे। उन्होने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में सरकार,पत्रकारिता का पक्ष रखते हुये अनेक बार चिंतन करने पर मजबूर कर दिया।

सत्यता परख कर समाचार प्रकाशित हों-कलेक्टर शर्मा

प्रथम वक्ता के रूप में जिले के कलेक्टर डा.शर्मा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पहले मनुष्य होता है, मनुष्य के बाद वह कोई पद धारण करता है, ईश्वर ने आपको मनुष्य बनाया है तो जीवन में कभी मनुष्यता नहीं छोड़ना चाहिये। उसके बाद आप पत्रकार है, हम अधिकारी है, कोई कर्मचारी है आपकी सेवाएं राष्ट्र के लिये प्रदेश के लिये, समाज के लिये जग जाहिर है। आपके द्वारा जो समाचार प्रकाशित होते हैं, उससे जनमानस बनता है और उसके लिये आप एक अच्छी भूमिका अदा करते हैं। उन्होने कहा कि आपके द्वारा अखबार में प्रकाशित जितनी भी खबरें रहती हैं में देखता हूं, पढ़ता हूं, अच्छी खबरें रहती हैं। कुछ अच्छी खबरें भी होती है कुछ अच्छी खबरें भी नहीं रहती हैं, में केवल आपसे यह कहना चाहूंगा की जो आपके द्वारा समाचार प्रकाशित होते हैं उनकी सत्यता परख कर समाचार पत्रों में उसका प्रकाशन हो तो और बेहतर होगा। उन्होंने कहा कोई समस्या हो तो मुझसे जरूर मिलें में, मै भी आपसे अपेक्षा करूंगा कि हमें आपका सहयोग बराबर मिलेगा।
अच्छाई को भी अच्छे तरीके से प्रकाशित किया जाये-तिलक सिंह
पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह ने कहा चाहे वह अधिकारी हो, कर्मचारी हो या कोई व्यक्ति हो वह समाचार पत्रों पर ध्यान देता है, समाचार पत्र पढ़ने से उसके मन में प्रभाव पड़ता है कि इस संसार में चल क्या रहा है। इसलिये जरूरी है कि समाचार में सत्यता निश्चित तौर से होना चाहिये। उन्होंने कहा चाहे में हूं या समाचार से जुड़ा व्यक्ति है उसकी व्यक्तिगत छबि भी काम करती है। आप क्या थे आपका अतीत क्या है वह भी मायने रखती है। अच्छाई को भी अच्छे तरीके से प्रकाशित किया जाये।

इन्होने भी किया संबोधित-
उक्त कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार गिरीश शर्मा ने कहा यह प्रोफेशन है प्रोफेशन में व्यक्ति ईमानदार होता है, दूसरे के प्रति ईमानदार होने की अपेक्षा नहीं होती है। वरिष्ठ पत्रकार नारायण सिंह ठाकुर ने कहा यहां पर बहुत से लोग बैठे हैं, जिनके साथ हमने कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है। में कहनाचाहता हूं कि जो काम आने वाली चीज हैं वह निष्ठा, हमारी इमानदारी और कुछ नहीं।वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र दुबे ने कहा हम नजर डालते हैं सबसे बड़े लोकतंत्र पर और लोकतंत्र की मानस परिभाषा है, सरकार जनता की, जनता के लिये और जनता के दौरान, लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंत्र है। लोकतंत्र की जो इमारत है, वह चार स्तंभ पर खड़ी है पहला है स्तंभ है विधायिका, दूसरा है कार्यपालिका, तीसरा है न्यायपालिका, चौथा स्तंभ हमारा है, जिसे हमें प्रेस कहते थे अब मीडिया भी कह सकते हैं।उन्होंने कहा हमें जनता के बीच जाना पड़ता है हमारा अखबार बिके, हमें विज्ञापन मिले, हमारे चौनल्स को संसाधन मिले तो हम वह व्यक्ति है वह संस्थान है जो जनता से सीधे जुड़ाव से जुड़े हुये हैं। हम जनता के काम कर रहे हैं। श्री दुबे ने कहा पहले संस्थान उद्योग पतियों के पास होते थे, संपादक के नाम होते थे, स्वतंत्र रूप से चला सकते थे आज मीडियाकर्मी है केवल कर्मचारी बनकर रह गये हैं।कार्यक्रम के दौरान जनसम्पर्क विभाग द्वारा फोल्डर तैयार कर प्रचार साहित्य वितरण किया गया।  इस मौके पर जिले की सम्मानीय मीडिया बड़ी संख्या में मौजूद थी।

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