शहीदों की गौरव गाथाओं से भरा पडा जिले का इतिहास
- प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा गर्व है कि क्षेत्र का सांसद हूं
- तिरंगा यात्रा सैकडों मील का मोटर साईकिल से सफर
डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/ 19/08/2016 शहीदों का स्मरण,राष्ट्र का वंदन,माथे पर देश भक्ति का चंदन,तिरंगे को थामें हाथ,भारत माता की जयकारों के साथ देश भक्ति के गुंजायमान होते मार्ग जी हां एैसा ही कुछ नजारा रहा जिले के उन क्षेत्रों का जहां से होकर तिरंगा यात्रा निकली। क्षेत्र के अमर शहीदों के त्याग और बलिदान की गौरव गाथाओं से जब लोग विशेष कर युवा वर्ग परिचित होते तो उनकी आंखों की चमक निश्चित रूप से अपने आपको गौरांवित महसूस करने की ओर ईशारा करती प्रतीत होती थी। ज्ञात हो कि दमोह क्षेत्र का इतिहास अपने आपमें एक गौरवशाली रहा है जहां के राष्ट्र भक्तों ने अपने प्राणों की आहुतियां देकर भारत माता की रक्षा के लिये अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था। एैसे ही महान अमर शहीदों के स्मरण उनके वंदन के लिये देश के प्रधान मंत्री नरेंन्द्र मोदी के आव्हान पर देश भर में तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। श्री मोदी ने देश के समस्त सांसदों को अपने-अपने क्षेत्र के अमर शहीदों को याद कर उनके त्याग एवं बलिदान को याद करने का आव्हान किया है। इसी क्रम में दमोह संसदीय क्षेत्र के सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने लगातार तीन दिनों तक मोटर साईकिल से यात्रा करते हुये सैकडों मील का मार्ग तय किया। श्री पटेल ने तिरंगा यात्रा के दौरान उन सभी जगहों पर पहुंचने की योजना पर कार्य किया जहां-जहां अमर शहीदों का स्थान है। 15 अगस्त 16 को दोपहर 12 बजे स्थानीय यशवंत चौक से प्रारंभ हुई तिरंगा यात्रा का प्रथम दिन का सफर ही लगभग 225 किलोमीटर रहा। तिरंगा यात्रा के दौरान जहां अमर शहीदों का स्मरण किया गया तो वहीं उनके परिजनों को भी सम्मानित किया गया।
बुंदेला विद्रोह का केन्द्र बिन्दु-
तिरंगा यात्रा की अगुवाई कर रहे क्षेत्र के सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने यात्रा के दौरान तय स्थानों पर जाकर जहां शहीदों की गौरव गाथाओं को लोगों के मध्य रखा तो वहीं कहा कि में अपने आपको गौरांवित महसूस करता हूं कि मुझे यहां सेवा करने का मौका मिला। महान वीरों की भूमि दमोह का सांसद होने पर मुझे गर्व है। श्री पटेल ने कहा कि यहा ंका इतिहास क्रांतिकारियों,अमर शहीदों की गौरवगाथाओं से भरा पडा है। इन्होने कहा कि 1857 की क्रांति के पूर्व भी एक क्रांति हुई थी जिसको बुंदेला विद्रोह कहा जाता है। 1842 से चला यह विद्रोह का केन्द्र बिन्दु दमोह रहा क्या यह गर्व की बात नहीं है। इन्होने कहा कि शहीदों की न तो जाति होती है न पार्टी होती है वह तो पूरे राष्ट्र के होते हैं। जिनकी कुर्बानी के कारण हम आज आजाद हैं उनको याद करना हम सबकी जबाबदारी है।
युवाओं का सीख-
सांसद श्री पटेल ने उपस्थित विशाल जनसमूहों को संबोधित करते हुये कहा कि याद रखो कि तुम्हारे चरित्र पर कोई आंच न आने पाये। क्योंकि दुश्मन देश को नष्ट करने के लिये विभिन्न प्रकार के पेंतरे अपनाते हैं। नशा से दूर रहने एवं चरित्र को बनाये रखने की अपील करते हुये कहा कि राष्ट्र को तुम्हारी आवश्यकता है। श्री पटेल ने कहा कि याद रखना कि एक बार चरित्र पतन और गलत मार्ग अपनाने के बाद जीवन भर वह तुम्हारे अच्छे कार्य में भूत बनकर सामने खडा होता है। श्री पटेल ने कहा कि हर कार्य के लिये पैसे की आवश्यकता नहीं होती तन और मन दोनो ही काफी हैं। जो आपके पास वह दुनिया के किसी के पास नहीं इसलिये अच्छे कार्यो में अपने आपको लगा दो।
सैकडों मील का सफर मोटर साईकिल-
तिरंगा यात्रा के दौरान सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने तीन दिन में सैकडो मील की दूरी तय की जिसमें बडी संख्या में राष्ट्र भक्तों ने सहभागिता की। इस यात्रा के दौरान एैसा वक्त भी आया जब दुर्गम मार्ग भी आया तो वहीं मौसम भी वितरीत होता रहा। लगातार चलती मोटर साईकिल पर तिरंगा यात्रा में न तो चेहरों पर थकान दिखी न जज्बे में कमी भारत माता के लालों की टोली अपने लक्ष्य को लेकर आगे बढती देखी गयी।
शहीदों का स्मरण,अर्पित किये श्रृद्धा सुमन -
अमर शहीदों के पुण्य स्मरण को लेकर निकली तिरंगा यात्रा का शुभारंभ 15 अगस्त को नगर के ही यशवंत चौक से प्रारंभ की गयी। एक भव्य समारोह के दौरान यहां क्रांतिकारियों की गौरव गाथा को सांसद प्रहलाद सिंह पटेल सहित मंचासीन वक्ताओं ने रखा। इस अवसर शहीदों के परिजनों को भी सम्मनित किया गया। ज्ञात हो कि नगर के ही शहीद यशवंत सिंह का जन्म 27 मई 1909 में फुटेरा वार्ड में हुआ था। इन्होने 21 जुलाई 1931 को 22 बर्ष की उम्र में नौकरी से अवकाश लेकर खण्डवा के पास लेफटीनेंट हेक्सट की हत्या एवं मेजर शीहन को घायल कर ब्रिटिश खजाना लूटा था। अंग्रेज सरकार ने इनको 11 दिसम्बर 1931 को रात्रि में 01 बजे फंासी दे दी थी। सांसद श्री पटेल ने शहीद प्रेम चंद जैन का भी स्मरण किया। इसी क्रम में जिले के ही बालाकोट पहुंचकर शहीद राव स्वरूप सिंह,मान सिंह सोने सिंह को याद किया गया एवं उनके परिजनों को सांसद श्री पटेल ने सम्मानित किया। ज्ञात हो कि 28 जुलाई 1857 को शहीद रावस्वरूप सिंह,मान सिंह,एवं सोने सिंह की सेना ने कैप्टन पिंकनी की 31 वीं एवं 42 वीं पैदल सेना को खदेडा तथा पन्ना राजा के सेनापति को हराकर सूबेदार गोविंद राव का राज तिलक गजानन टेेकरी के पास स्थित गढी में किया जो वर्तमान में गढी मोहल्ला के नाम से जाना जाता है। विदित हो कि बालाकोट की गढी के पास ब्रिटिश अधिकारियों पर हमले का सांकेतिक निशान आज भी मौजूद है। अंग्रेज सरकार ने इनको फांसी दे दी एवं बालाकोट के किले को ध्वस्त कर दिया था। इसी क्रम में तेजगढ के शहीद मेहरबान सिंह लोधी,भोपाल सिंह लोधी एवं मामू सिंह लोधी का स्मरण सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने उस किले में जाकर किया। ज्ञात हो कि इन पर अंग्रेज सरकार ने दो-दो सौ रूपये का ईनाम रखा था। इसी क्रम में जबेरा शहीद देवकरण ब्राम्हण को भी याद किया गया जिनके उपर भी दो सौ रूपये का इनाम रखा गया था। सिंगौरगढ के शहीद राजा देवी सिंह गौड को भी याद किया गया जिनके उपर भी दो सौ रूपये का ईनाम था। सांसद श्री पटेल ने रानी दुर्गावती की आदमकद प्रतिमा पर भी माल्यापर्ण सिग्रामपुर में किया।
इसी क्रम में मानगढ के शहीद राजा गंगाधर राव का भी स्मरण किया गया। ज्ञात हो कि पाटन के पास कोनी दर्रे में राजा गंगाधर राव युद्ध में शहीद हो गये थे। अंगे्रज सरकार ने श्री राव के उपर पांच सौ रूपये का ईनाम घोषित कर रखा था। इनकी 65 ग्रामों की जागीर को भी जप्त कर लिया था। इसी क्रम में यात्रा अभाना पहुंची जहां शहीद मलखान सिंह लोधी,शहीद तेजी सिंह लोधी का स्मरण किया गया। ज्ञात हो कि अंग्रेज सरकार ने इनके उपर दो-दो सौ रूपये का ईनाम रखा था।
जिले के अमर शहीदों के स्मरण का सिलसिला दुसरे दिन अर्थात् 16 अगस्त को भी जारी रहा। तिरंगा यात्रा की अगुवाई करते हुये सांसद प्रहलाद सिंह पटेल ने हिण्डोरिया पहुंच कर शहीद राजा किशोर सिंह को याद किया तो शहीद कुषोरे भोसला लोधी एवं शहीद भोसे दीवान कंजूझलुकवार ब्राम्हण को याद किया। ज्ञात हो कि 10 जुलाई 1857 को राजा किशोर सिंह ने अपने भाईयों एवं 400 क्रांतिवीरों के साथ दमोह पर आक्रमण कर कब्जा कर लिया था। अंग्रेजो ने उन पर एक हजार रूपये का ईनाम घोषित कर रखा था। नगर में शहीद रानी आवंती बाई लोधी को भी याद किया गया एवं उनकी आदमकद प्रतिमा पर पुष्पहार चढाया गया।
जिले के अमर शहीदों के स्मरण के क्रम के तीसरे दिन 17 अगस्त को नरसिंहगढ में फंसिया नाला पहुंच शहीदों का स्मरण किया गया। ज्ञात हो कि 16 सितम्बर 1857 के दिन शहीद सूबेदार रघुनाथ राव करमरकर,रामचंद्र राव,शहीद पंडित अजब दास तिवारी के परिवार के दुध मुंहे बच्चे को भी गोली से भून दिया था। इसी नाले पर अनेक लोगों को फांसी पर चढा दिया गया था। फांसी जिस वृक्ष पर दी गयी थी उस नीम के वृक्ष को पुष्प अर्पित कर शहीदों को याद किया। इसी क्रम में जेरठ के शहीद हीरालाल लोधी,हिन्दुपुर लोधी,देवकरण लोधी,बिसाम सिंह लोधी,सुरनीत सिंह लोधी,मोरे सिंह लोधी,सोने सिंह लोधी जिनके उपर अंग्रेज सरकार ने दो-दो सौ रूपये का ईनाम घोषित कर रखा था एवं फंसिया नाले में फांसी दी गयी थी का स्मरण किया गया था। किशनगंज के शहीद पंचम सिंह जिनके उपर सौ रूपये का ईनाम था को भी याद किया गया। शाहगढ के राजा शहीद बखतबली को भी याद किया गया। ज्ञात हो कि श्री शाह महाराजा छत्रपाल के वंशज थे जिन्होने दमोह जिले के लोधी सरदारों व किशोर सिंह को अंग्रेजों के विरूद्ध संगठित होकर युद्ध का आव्हान किया था। श्री शाह के उपर अंग्रेज सरकार ने जिन्दा या मुर्दा पकडने पर दस हजार का ईनाम घोषित कर रखा था।







टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें