धर्म-कंचनपुरी में हनुमान मंदिर भक्तों का लगता तांता
धर्म-
श्रीराम भक्त करते हैं भक्तों की पीडा को दूर
जिले के कंचनपुरी में हनुमान मंदिर भक्तों का लगता तांता
डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/ 04/08/2016 मान्यताओं की पूर्ति के साथ ही लोगों के संकटों का हरण होने पर भक्तोंं की भारी भीड लगातार यहां उमडती देखी जा सकती है। संकट मोचक पवन पुत्र के दरबार में लगातार यूं तो प्रतिदिन श्रृद्धालुओं की भीड होती है परन्तु यह मंगलवार,शनिवार के साथ विशेष पर्वों पर अधिक हो जाती है। हम बात कर रहे हैं जिले के ही ग्राम कंचनपुरी में स्थापित मंदिर की जहां के चमत्कारों को आये दिन लोगों के मुंह से सुना जा सकता है। इतिहास के जानकारों की माने तो इस क्षेत्र में कोई महल हुआ करता था जो कि कई हजार बर्ष प्राचीन हो सकता है। यहां मिलने वाले अवशेष इसकी गौरव गाथा स्वयं गाते देखे जा सकते हैं। वहीं समीप स्थित देवी मंदिर भी इसी समय का बतलाया जाता है। समय के साथ धरा में समा चुके महल एवं यहां पर जंगल होने से लोग यहां के इतिहास से दूर होते गये। प्रदेश के अनेक जिलों से लोगों का यहां आना जाना लगा रहता है।
भगवान का आदेश और मंदिर का निर्माण-
यहां स्थापित मंदिर की स्थापना के पीछे भगवान श्रीराम का आदेश होना बतलाते हैं यहां के महंत श्रीश्री 1008 संत गनेश सिंह जी जो कहते हैं कि यहां जो भी चमत्कार हैं वह प्रभु के ही हैं। उनके आदेश पर ही बर्ष 2004 में यह सिलसिला प्रारंभ हुआ और 2008 में यह पूर्ण हो गया। आपको बतलादें कि संत गणेश सिंह कोई सामान्य व्यक्ति नहीं हैं धर्म,अध्यात्म के ज्ञानी होने के साथ ही वह एक इंजीनियर हैं। वह एक प्रश्र के उत्तर में कहते हैं कि भगवान श्रीराम का राज्य इस धरा पर पुन: स्थापित हो चुका है मंत्री मंडल का गठन हो चुका है। वह कहते हैं कि वर्तमान में होने वाले असुरों अर्थात् आंतकवादी के मरने तथा उनको मारने में का सिलसिला जो प्रारंभ हुआ है यह सब प्रभु की कृपा है। आने वाले कुछ बर्षों में ही यह और तीव्र गति से होगा। भारत एक मजबूत राष्ट्र और महाशक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है जिसका लोहा अब विश्व भी मानने लगा है। सभी प्राणियों को धर्म एवं अध्यात्म के मार्ग पर चलना चाहिये तथा सार्वजनिक अनुष्ठान,श्रीमद्भागवत कथा,मंदिरों के निर्माण से बचना चाहिये। क्योंकि गलती होने पर हानि सभी को उठानी पडती है। एक प्रश्र के उत्तर में संत जी कहते हैं कि यहां जो भी चमत्कार होते हैं वह प्रभु श्रीराम के ही कारण हैं पवन पुत्र हनुमान यहां सभी के संकट दूर करते हैं। यहां दर्शन मात्र एवं परिसर में प्रवेश होते ही भक्तों के संकट दूर होना प्रारंभ हो जाते हैं।




टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें