चिल्लर की समस्या या व्यक्ति हित?
चिल्लर की समस्या या व्यक्ति हित?
- समस्या को लेकर उपज रहे अनेक प्रश्न?
(डा. एल.एन.वैष्णव)
(डा. एल.एन.वैष्णव)
दमोह /28/01/2018/समस्या है या फिर पैदा की जा रही है किसके लिए स्वयं के लिए या जनता के लिए या फिर कुछ और चर्चाओं का बाजार गर्म है ?परेशान जनता पूर्व में भी थी अब भी है पूर्व में चिल्लर की कमी का रोना और आप चिल्लर की अधिकता का रोना तथाकथित कुछ व्यापारी पूर्व में ही फायदे में थे और आज भी दिखलाई देते हैं जबकि जनता पूर्व में भी परेशान थी और आज भी दिखाई देती है बात कर रहे हैं फुटकर चिल्लर पैसों की जो भारतीय मुद्रा होने के बावजूद भी कुछ तथाकथितों के हाथ का खिलौना बन रही है जिनके कंधों पर जिम्मेदारी है वह कुंभकर्ण की निद्रा में है और ठीक वैसे ही जागते हैं जैसे कुंभकरण जागता था हाल ही में नगर में 1 बड़े आंदोलन को लेकर पिछले लगभग 20 दिनों से तैयारियां चल रही है और शासन-प्रशासन विरोधी नारे गीत संगीत के माध्यम से माहौल बनाया जा रहा है ?आंदोलनकारियों के अनुसार एक बड़ी समस्या है जिसमें चिल्लर की अधिकता बतलाई जाती है बड़ा अजीब सा मामला आता है जिसमें बैंकों द्वारा चिल्लाना लेना और फिर अचानक यह कहना कि बड़े व्यापारी भी नहीं लेते हैं अगर बातें आंदोलनकारियों की माने तो फिर यह बात भी सामने आती है कि बैंकों के बाद आंदोलनकारी उनके विरुद्ध भी खड़े होने लगे हैं? जिन का समर्थन लेकर वह कभी आंदोलन को सफल बनाने के लिए पत्र लिख रहे थे संपर्क कर रहे थे बेचारी जनता तो तब भी परेशान थी आज भी परेशान दिखाई देती है।
*वित्त मंत्री के नगर में आंदोलन-
बड़ा अजीब इत्तेफाक है कि मध्य प्रदेश शासन के वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया के गृह नगर में चिल्लर को लेकर आंदोलन करने की तैयारी पिछले लगभग 20 दिनों से हो रही हो और उन सभी व्यापारी संगठनों का सहयोग मिलने लगे जो भैया और पार्टी के सबसे खास होने का दम भरते हो मामला चिल्लर का नहीं है इसकी समस्या के समाधान के लिए प्रयास पूर्व में भी किए जा सकते थे और इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि समाचार पत्रों में जारी विज्ञप्ति मैं चिल्लर ना लेने कानूनी कार्रवाई करने की बातों को प्रकाशित कराया गया था पर क्या प्रशासन एवं संबंधित विभाग ने ऐसा किया तो उत्तर होगा कि नहीं ।प्राप्त जानकारी के अनुसार एक भी मामला पंजीबद्ध नहीं किया गया है जबकि जनता चिल्लर लेने और देने के लिए तैयार खड़ी दिखलाई देती है? बात करें बैंकों की तो उनकी अपनी क्या समस्या है और वह उसका निदान कैसे करते हैं या शासन-प्रशासन कैसे कराता है यह वही जाने पर ऐसा प्रतीत होता है कि जिस राह पर चल रहे थे उसको या तो शासन-प्रशासन हल्के में लेता रहा या फिर जानबूझकर ऐसा किया गया आंदोलन को लेकर जो संदेश प्रदेश में जाने लगा है उसमें प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया का गृह नगर और उस पर भी भारतीय जनता पार्टी के साख पर बट्टा लगने से अब रोक पाना संभव दिखाई नहीं देता प्रश्न उठता है कि शासन प्रशासन की गुप्तचर एजेंसियां तथा भारतीय जनता पार्टी के अपने आप को कर्णधार मानने वाले तथाकथित समस्या को भांपने में विफल क्यों हो रहे हैं सूत्रों की माने तो आंदोलनकारियों का जिस प्रकार प्रचार और प्रसार हुआ उस पर होने वाले खर्च तथा धनराशि के जुटने पर भी तो प्रश्न उठता है ?प्रश्न तो यह भी उठता है कि कुछ लोगों के बिना लाइसेंस के बड़ी राशि के ब्याज पर कुछ धंधे भी चल रहे हैं मामला जो भी हो पर चर्चाएं तो है? अगर सूत्रों की माने 10% के लगभग लघु व्यापारी प्रतिदिन बैंक राशि जमा करने जाते होंगे बाकी तो अपने परिवार के उधर पोषण की राशि जुटा पाते हैं ?यानी मामला बैंक का कम बड़े और लघु व्यापारियों के मध्य ज्यादा दिखाई देता है?
*समाधान तो फिर आंदोलन क्यों-
जिस विषय को लेकर आंदोलनकारी मैदान में और उसकी समस्या का समाधान करने के लिए कुछ दिन पूर्व ही निदान कर लिया गया हो फिर भी लगातार प्रचार-प्रसार शासन प्रशासन के विरुद्ध में किया जाता रहे तो फिर जहां एक ओर आंदोलनकारियों की नियत और नीति पर प्रश्न चिन्ह अंकित होते हैं तो वही समर्थन करने वालों के ऊपर भी साथ शासन प्रशासन के जिम्मेदारों के ऊपर भी आखिर जब समस्या का समाधान करने हेतु पत्र लिखकर निर्देश जारी कर दिए गए हो तो फिर प्रचार प्रसार के माध्यम से जनता के बीच आंदोलनकारियों के अस्थिरता फैलाने एवं व्यापार की जगह नेतागिरी करने वाले लोगों को बेनकाब क्यों नहीं किया गया? आखिर किसके इशारे पर शासन प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी नाचने में लगे हुए हैं नगर में फैलने वाली अस्थिरता तथा शासन विरोधी बनने वाले माहौल के लिए आखिर कौन जवाबदार होगा जैसे अनेक प्रश्न उपज रहे हैं? आम जनमानस के बीच जिसका जवाब जनता चाह रही है ?
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