धर्म संस्कृति

मकर संक्रांति पर्व पर देव जटाशंकर धाम उमडी भक्तों की भीड़
-  दशकों प्राचीन मेले की परंपरा
डॉ एल.एन. वैष्णव
दमोह/ दिनांक 15 जनवरी 2018/ बम बम भोले के जयकारों से गूंजता परिसर घंटो घड़ियालों के धुन से गुंजायमान होते क्षेत्र में भक्तों की भीड़ भगवान औघड़दानी भोले शंकर शिवलिंग के पूजन-अर्चन एवं दर्शन के साथ मनोकामनाओं को पूर्ण होने का आशीर्वाद मांग रहे थे ।वहीं दूसरी ओर विशाल परिसर में लगे हुए मेले में बच्चों की चहचहाहट प्रसन्न पक्षियों की तरह गुंजायमान हो रही थी ।जी हां यह नजारा था दमोह नगर के देव जटाशंकर धाम का जहां दशकों से चली आ रही परंपरा मैं हजारों भक्तों ने उपस्थित होकर सहभागिता की । विदित हो कि प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के पर्व पर तीन दिवसीय मेले के आयोजन की अति प्राचीन परंपरा यहां चली आ रही है जहां सामाजिक समरसता का एक संदेश देखा जा सकता है सभी वर्ग और समुदाय के लोग यहां व्यापार करने के लिए आते हैं और व्यापार से कमाए हुए धन से अपने परिवार का उदर पोषण भी करते हैं
-धार्मिक ,वैज्ञानिक, सामाजिक रहस्य-
ज्ञात हो कि सनातन धर्म में मकर संक्रांति का एक विशेष महत्व बताया जाता है उत्साह के साथ भगवान सूर्य और शिव की आराधना तथा पवित्र नदियों सरोवर में स्नान और तिल गुड़ और खिचड़ी ग्रहण करने के साथ दान करने की परंपरा बतलाई जाती है इसके पीछे की अवधारणा धार्मिक और वैज्ञानिक के साथ ही सामाजिक भी बतलाई जाती है। जिस प्रकार अलग अलग छोटे छोटे तिल को मिठास रूपी गुड़ के साथ मिलाकर एकत्र कर लिया जाता है उसी प्रकार मधुर वाणी और प्रेम के साथ सभी वर्ग और समुदाय के व्यक्तियों को एकत्रित करने का संदेश देता है जिस प्रकार शीत ऋतु मैं रूखापन आने लगता है। उसको दूर करने के लिए शरीर में आवश्यक तत्व की पूर्ति के लिए तिल और गुड़ का विशेष महत्व होता है । मकर राशि में सूर्य के आने पर यह पर्व अति उत्साह के साथ मनाने की युगों युगों से परंपरा सनातन धर्म में बतलाई गई है। देखा जाए तो भारत के विभिन्न प्रांतों में अलग अलग नामों से उत्साह के साथ क्षेत्रीय परंपरा के अनुरूप श्रद्धालु सनातन धर्म के अनुयाई बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं।
-दशकों पुरानी मेले की परंपरा-
नगर के देव जटाशंकर धाम मैं मेले की परंपरा दशकों प्राचीन बतलाई जाती है ।वही मंदिर में स्थापित शिवलिंग के बारे में बताया जाता है की जुगल प्रसाद आत्मज जगन्नाथ प्रसाद पाठक ज्योति टीकमगढ़ जिले की निवासी थे धर्म और भक्ति में लीन रहते थे ।स्वप्न में उनको शिवलिंग होने की बात पता चली और उन्होंने यहां आकर शिवलिंग को पाया पहाड़ी के नीचे और चारों ओर घनघोर जंगल हुआ करता था मंदिर में ही अपना पूरा समय देने वाली जुगल किशोर पाठक के पुत्र केशव प्रसाद पाठक की धर्मपत्नी 75 वर्षीय शारदाबाई पाठक बतलाती है कि लगभग 125 वर्ष पुरानी यह बात है देश में अंग्रेजों का शासन था हमारे पूर्वज जुगल प्रसाद जी लगातार यहां पूजन-अर्चन करते रहते थे ।कुछ कुछ लोगों का आना जाना प्रारंभ हुआ और मनोकामनाएं पूर्ण होना प्रारंभ हो गई ।धीरे धीरे भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की प्रसिद्धि बढ़ने लगी वह बताती है कि संवत 1990 यानी आज से लगभग 84 वर्ष पूर्व दरबारी लाल अग्रवाल ने मनोकामना पूर्ण होने पर विशाल मंदिर का निर्माण कराया वही एक विशाल द्वार का निर्माण जगदीश नारायण जयसवाल एवं विशाल गणपति की मूर्ति और मंदिर का निर्माण रामनारायण श्रीवास्तव रामू भैया ने करवाया दशकों से मेले भरने की परंपरा यहां है लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है ।वह यहां आते हैं और भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की पूजन अर्चन करते हैं।
-विशेष व्यवस्था लोगों में उत्साह--
देव जटाशंकर धाम मैं प्रारंभ हुए तीन दिवसीय मकर संक्रांति मेले मैं इस वर्ष विशेष व्यवस्था की गई है ।भक्तों को बैठने और आने जाने के लिए स्थाई कुर्सियों साहित रेलिंग विशेष आकर्षक विद्युत साज सज्जा पेयजल व्यवस्था की गई है जो जटाशंकर धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष आलोक गोस्वामी ने बताया कि श्रद्धालुओं के लिए बेहतर से बेहतर व्यवस्थाएं देने के लिए लगातार कार्य चल रहा है । उन्होंने बताया  कि उपाध्यक्ष संजय राय, वरिष्ठ सदस्य अधिवक्ता अनिल धगट़ ,सुधीर सप्रे, गोपाल पटेल बृज बिहारी एवं आनंद पटेरिया साहित सभी सदस्यों की सहभागिता लगातार बनी हुई है ।वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन एवं पुलिस की विशेष व्यवस्था यहां पर लगी हुई है ।ब्रह्म मुहूर्त देर रात्रि तक भक्तों का आने जाने का सिलसिला लगातार लगा हुआ है।

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