जमकर हो रहा डीजे का प्रयोग,नियम,कानून की उडती धज्जियां
डा.एल.एन.वैष्णव
दमोह/19-01-2017-भले ही माननीय न्यायालय ने ध्वनी प्रदुषण की बात को गंभीरता से लेते हुये डीजे जैसे तेज सांउडों के प्रयोगों को प्रतिबंधित किया हो। परन्तु संबधित विभाग के आला अधिकारियों की लापरवाही उक्त निर्णय को लागू करने में नाकामयाब से दिखलाई देते हैंं? यह बात अलग है कि उनके द्वारा कागजों में उक्त निर्णय को पालन करने निर्देश एवं समाचारों का प्रकाशन कर संबधितों को सूचित कर दिया है।लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और बयां करती देखी जा सकती है जिससे संबधित विभाग के अधिकारी,कर्मचारियों के दावों की पोल खुलती देखी जा सकती है। सडकों पर बारातों के निकलते समय जमकर तय सीमा को कई गुना पार कर बजते डीजे और उनसे होता शोर राहगीरों सहित समीप निवास करने वाले के लिये परेशानी का कारण बनता रहता है। वहीं संचालित मैरिज गार्डन एवं बारात घरों के उपर तो हाल ही मैं स्वयं नपा प्रश्न चिंह अंकित कर चुकी है।
अंधे-बहरे और क्या लंगडे भी?-
उक्त नियमों की जमकर धज्जियों को उडाया जा रहा हो?और जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन सहित नपा खमोश दिखलायी दे तो फिर जनता में प्रश्न उपजना तो लाजमी है? शोर से होने वाले प्रदुषण से लोगों की परेशानी को आये दिन देखा जा सकता है?गत दिवस घंटाघर पर चारों से आयी बारातें और उनमें बजते डीजे के शोर के चलते अफराफरी का माहौल बना रहा। उपस्थित यातायात पुलिस कर्मियों को यातायात में आये व्यवधान को दूर करने काफी मशक्कत करनी पडी। परेशान लोगों के मुंह से सुना गया कि क्या किसी को यह दिखलायी नहीं देता प्रशासन के अधिकारी तो अंधे-बहरे और अब लंगडे हो गये हैं?
तेज ध्वनी से हानि-
जानकारों की माने तो तेज ध्वनि किसी प्राणी के लिये मृत्यू का कारण भी बन सकती है। अगर विश्व के कुछ महान लोगों के द्वारा उक्त विषय को लेकर की चिंताओं पर नजर डालें तो देखेंगे कि ध्वनि प्रदूषण से होने वाले खतरों की गम्भीरता को देखकर नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक राबर्ट कोच ने आठ दशक पूर्व प्रतिक्रिया व्यक्त की थी कि भविष्य में एक दिन ऐसा आएगा, जब मनुष्य को स्वास्थ्य के सबसे बड़े शत्रु के रूप में शोर से संर्घष करना पड़ेगा। वहीं कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के पूर्व चान्सलर डॉ. वर्ननुडसन का मत है कि शोर एक धीमी गति वाला मृत्युदण्ड है।
कार्यवाही पर उठते प्रश्न-
सूत्रों की माने तो कुछ मामलों को छोड दिया जाये तो कार्यवाही न होने का प्रतिशत सबसे ज्यादा होगा?शांति कमेटी के निर्णय और चर्चा हो या फिर समय-समय पर कागजी घोडा दौडा कर प्रशंसा बटोरने वाले अधिकारी सब अपनी कार्यप्रणालियों को लेकर चर्चाओं में बने रहते हैं?अनेक जगहों पर तो संबधित अधिकारियों की उपस्थिति में ही नियमों का उलंघन होना लगातार चर्चाओं में बना हुआ है।
....................................................0000000000000..........................................

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें