आधा दर्जन से अधिक तालाब,दो दर्जन से अधिक कुये,बाबडी,बीस इंच अधिक बारिश फिर भी प्यासा

आधा दर्जन से अधिक तालाब,दो दर्जन से अधिक कुये,बाबडी,बीस इंच अधिक बारिश फिर भी प्यासा

शहर प्यासा,अधिकारियों ,जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का नमूनाकलेक्ट्रर ने किया जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित

डा.एल.एन.वैष्णव

दमोह/14-05-2017 जल के संकट ने फिर से शहर को चपेट ले लिया है पानी के लिये जद्दोजहद करते नागरिक हजारों पीले कुप्पों की फौज के साथ बच्चे,महिलायें भी सडकों पर आपको देखने मिल जायेंगे। वह उस समय जब जिले में औसत से लगभग 20 इंच अधिक बारिश हुई हो ? लगभग बीस बर्ष से अधिक समय से जल संकट से निपटने के लिये बनती,बिगडती योजनायें उनके क्रियांवयन पर करोडों का खर्च और उस पर भी समाधान शीघ्र होने को लेकर आये दिन जनता के सामने भाषण देते जन प्रतिनिधि जिसको लेकर अब सडकों चैराहों,तिराहों तो छोडो बस,ट्रेनों में भी स्थानीय लोगों की प्रश्नात्मक चर्चायें आम हो चुकी हैं? एैसा नहीं कि शहर में जल स्त्रोतों की कमी रही हो परन्तु उदासीनता का आलम क्या रहा है सब जानते हैं?बतलादें कि आधा दर्जन से अधिक तालाब एवं दो दर्जन से अधिक कुये बाबडियों का शहर फिर भी प्यासा और जल संकट से जूझ रहा है? सैकडों बर्ष प्राचीन इन जल स्त्रोतों का रख रखाव एवं साफ-सफाई के आभाव में दम टूटने लगा है। लापरवाह अधिकारी,उदासीन जनप्रतिनिधियों के चलते जनता की परेशानी साफ देखी जा सकती है। सूत्रों की माने तो पिछले कई बर्षों के दौरान करोडों रूपयों की फाग खेली जा चुकी हैं। हम आपको बतला दें कि यह वह शहर है जो प्रदेश के वित्त मंत्री जयंत कुमार मलैया का गृह नगर है। नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी हैं जो भारतीय जनता पार्टी की हैं तथा 39 में से सर्वाधिक वार्डो पर भाजपा का कब्जा है। पिछले कई दशकों से यह नगर जल संकट से जूझ रहा है अधिकांश सरोवरों को विकास की भेंट चढा दिया गया है। पीपी एवं मस्टर एवं मास्टर के हस्तक्षेप वाली नगरपालिका की चर्चा इस समय जमकर बनी हुई है? जानकार बतलाते हैं कि अगर सरोवर,कुये बाबडियों को सही ढंग से मरम्मत कर उनकी साफ-सफाई कर दी जाये तो नगर की जल समस्या का समाधान हो सकता है। 

औसत से 20 इंच अधिक बारिश-

जिले में गत बर्ष में हुई बर्षा को देखा जाये तो यह औसत से काफी अधिक बतलायी जाती है। जानकारों की माने तो जिले में 42 से 45 इंच की औसत बर्षा होती है जबकि गत बर्ष में यह 65 इंच हुई जो कि जिला मुख्यालय पर स्थित भू-अभिलेख कार्यालय के अभिलेखों में भी दर्ज है। अब सवाल यह उठता है कि इतनी अधिक बर्षा होने के बाबजूद भी पानी को सहेजने में जिला प्रशासन,नगर पालिका और संबधित विभाग क्यों कामयाब नहीं हो पाये? पानी में गति अवरोध बना या फिर बनाया गया? करोडों की सडकों के निर्माण और फिर खुदाई की चर्चा अभी वैसे भी चरम सीमा पर है?

कहां-कहां कुआ,बाबडी-  

नगर में दो दर्जन से अधिक कुआ एवं बाबडियां सैकडों बर्ष प्राचीन हैं जो कि नगर सहित बाहर से आने वाले राहगीरों के सूखे कंठों को तर करने का कार्य करती थीं। इनके निर्माण के लिये स्थल का चुनाव करना भी अपने आप में पूर्वजों की बुद्धिमता को प्रणाम करने का मन किसका नहीं होता होगा। जब भीषण गर्मी में पानी की त्राहि-त्राहि हो रही हो और यह जल स्त्रोत पानी से लबालब भरे हों? नगर की प्रमुख कुये बाबडियों पर अगर नजर डालें तो पुलिस कंट्रोल रूम के पास,मछरया कुंआ,ब्लाक ऑफिस परिसर,बारहद्वारी,न्यायालय परिसर,जेल के पीछे,राम मंदिर,धरमपुरा,कलेक्ट्रर बंगला के पास,आईबी ऑफिस के पास,मल्लपुरा,फिल्टर,सीता बाबडी,तमरयाई,ईसाई मुहल्ला शांतिबाई के घर के पास,परेश लायल के घर के पास,डा.विजय लाल निवास के पीछे,कलेक्ट्रेड,जटाशंकर,बुंदाबहु मंदिर,पुरैना तालाब के पास आदि प्रमुख बतलाये जाते हैं। 

विकास की भेंट चढ़े सरोवर-

इतिहास पर अगर नजर डालें तो नजर का ही एक वृहद सरोवर को मात्र इसलिये मिट्टी और मलबे से पूर दिया गया क्योंकि वहां शापिंग सेन्टर का निर्माण किया जाना था। यह सब हुआ उस समय जब प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी, जी हां हम बात कर रहे हैं कचैरा तालाब की जो कि वर्तमान में कचैरा शापिंग सेन्टर के नाम से जाना जाता है। वहीं एक छोटा तालाब जिसे उमा मिस़्त्री की तलैया के नाम से जाना जाता है वह भी समाप्त कर दिया गया। इसी क्रम में अगर देखें तो गत कुछ वर्षो पूर्व ही कैदों की तलैया के नाम से पहचाने जाने वाला छोटा सरोवर पूर दिया गया जहां आज मानस भवन एवं श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। इस समय प्रदेश और नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी का शासन था। इतिहास की ओर नजर डालें तो नगर के ही मध्य का एक वृहद महज इसलिये मलवा और मिट्टी से पूर दिया गया कि वहां एक शापिंग सेंटर का निर्माण किया जाना था। जी हां हम बात कर रहे है कचैरा शापिंग सेंटर की जहां वर्तमान में दुकाने ही दुकाने नजर आ रही हैं। यही  हाल उमा मिस्त्री के नाम से विख्यात तलैया का हुआ। यहां यह उल्लेख कर देना आवश्यक हो जाता है कि इस समय प्रदेश में और नगर पालिका में कांग्रेस सत्ता में थी। वहीं कुछ ही बर्ष पूर्व एक और छोटा सरोवर जिसे कैदों की तलैया के नाम से जाना जाता था विकास की भेंट चढा दिया गया। वर्तमान में वहां मानस भवन और श्री गुरू गोलवरकर मार्केट स्थापित है। जिस समय यह कार्य हुआ उस समय प्रदेश और नपा में भाजपा सत्ता में काबिज थी।

लाखों खर्च फिर भी नतीजा सिफर-

देखा जाये तो कडोरों रूपयों की राशि सरोवरों की साफ-सफाई एवं गहरीकरण में हो चुके हैं फिर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। यह सिलसिला आज भी जारी है नगर के ही मध्य के ही फुटेरा तालाब की बात करें या फिर बेलाताल की तो जो कुछ हो रहा है या होता है किसी से छिपा नहीं है। बात करें फुटेरा तालाब की तो जानकारों केे अनुसार लगभग 35 एकड की परिधि में फैला है जबकि देखके इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि कितना क्षेत्र अतिक्रमणकारियों के पास है। ज्ञात हो कि यही वह तालाब है जहां दुर्गा एवं गणेश प्रतिमाओं का विर्सजन होता है और नगर की बडी आबादी इसके जल का इस्तेमाल करती है। वहीं अगर बेलाताल की बात करें तो आप देखेंगे कि अगर क्षेत्रीय सांसद प्रहलाद पटेल ने एक संकल्प लेकर कार्य नहीं किया होता तो फिर वह भी आज मुस्कराने की जगह पूर्व की तरह अपनी दुदर्शा पर आंसु बहा रहा होता। छपा और दिखा रोग से पीढित बीमारी बढने पर उसका निदान कैसे करते नजर आते रहे किसी से छिपा नहीं है?बात करें दीवान जी की तलैया की तो वहां एक बडे गंदे नाले को जोड कर किस प्रकार पानी को गंदा करने तथा क्षेत्र के नागरिकों को बीमारी और बदबू में जीने के लिये मजबूर किया गया सर्व विदित है।

जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित, जल के प्रयोग को किया पूर्ण प्रतिबंधित

प्राप्त जानकारी के अनुसार दमोह जिले के नगरीय क्षेत्रों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्त्रोतों, कुएं, तालाब, हैण्डपम्प, नदी-नाला, ट¬ूब वेलइत्यादि में जल स्तर कम होता जा रहा है, इसके कारण पेयजल एवं निस्तार हेतु जल की कमी महसूस हो रही है। निकट भविष्य मेंजल की अत्यधिक कमी की पूर्ण संभावना को देखते हुये कलेक्टर डॉ. श्रीनिवास शर्मा ने कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकीयविभाग द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन पर पेयजल एवं निस्तार के उपयोग को छोड़कर अन्य प्रयोजनों हेतु मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षणअधिनियम 1986 तथा म.प्र. पेयजल परिरक्षण (संशोधित) अधिनियम 2002 अंतर्गत अन्य आदेश होने तक सम्पूर्ण जिले को जलअभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुये जल के प्रयोग को पूर्ण प्रतिबंधित कर दिया है। उन्होंने जिले के प्राकृतिक रूप से बहने वाली नदी-नालों तथा तालाबों में उपलब्ध पानी एवं भूमि सतह के नीचे पानी का घरेलूउपयोग एवं पशुधन के रख-रखाव के प्रयोजन के अतिरिक्त पानी की निकास, भवन निमार्ण (शासकीय निर्माण के कार्य को छोड़कर)जिसमें पानी का अत्यधिक उपयोग होता है वह भी उक्त अवधि के लिये तथा अधिनियम में उपबंधित नियमानुसार अपने क्षेत्र मेंकलेक्टर की अनुमति के बिना तथा पूर्व से स्थापित नलकूप की 150 मीटर की त्रिज्या में कोई भी नलकूप खनन को पूर्णतः प्रतिबंधितकिया है।





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नाना साहबपानसे स्मृति कार्यक्रम उचित गरिमा मिलनी चाहिए -प्रहलाद पटेल