आधे अधिक प्रदेश में जल संकट,पानी के लिये हाहाकार

आधे अधिक प्रदेश में जल संकट,पानी के लिये हाहाकार

डा.एल.एन.वैष्णव

गर्मी के भारी प्रकोप के साथ गहराते जल संकट ने लोगों के जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। जानकारों की माने तो अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाये गये तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। जल संकट कितना बना है और कितना बनाया गया है यह भी एक विचारणीय प्रश्न है। सूत्रों की माने तो जंगल,जमीन,रेत की तरह जल माफिया भी लम्बे समय से प्रदेश के अनेक जिलों में सक्रिय बने हुये हैं ? बतलाया जाता है कि टेंकरों की दौड में लम्बे गोल माल के साथ जेब तिजोरी में कितना माल जाता है और गया है किसी से छिपा नहीं है? वैसे देखा जाये तो गर्मी के प्रारंभ होते ही जल संकट के संकेत मिलना प्रारंभ हो गये थे वहीं दूसरी ओर अनेक क्षेत्रों में गत अनेक बर्षों से लगातार यह संकट सामने आता ही रहा है। इसके समाधान के लिये कितने प्रयास किये गये तथा कितने कारगर हुये किसी से छिपे नहीं हैं। मध्यप्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों की संख्या भीषण जल संकट वाले क्षेत्रों की बतलायी जाती है।

जल संकट से जुझते नगर-

प्राप्त जानकारी के अनुसार दमोह, सीहोर, पन्ना, रीवा, जबलपुर, सीधी, सागर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, कटनी, टीकमगढ़, सिवनी, रतलाम, सतना सिंगरौली, श्योपुर, छतरपुर, विदिशा, गुना, ग्वालियर तथा भिंड जैसे जिले जल संकट से जुझने वाले क्षेत्रों में प्रमुख बतलाये जाते हैं। देखा जाये तो उक्त जिलों में अधिकांश राजनैतिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले कद्ावरों नेताओं से संबध रखते हैं। सूत्र बतलाते हैं कि अनेक जिलों में हालात अधिक खराब हो गये हैं जहां पानी के लिये लोगों को रतजगा करने के साथ ही काफी संघर्ष करना पड रहा है। जानकारों की माने तो इसके लिये जितने जिम्मेदार जनप्रतिनिधि हैं तो उतने ही संबधित विभागों के अधिकारी जिनकी अर्कमण्डता का परिणाम जनता भोग रही है। वहीं दूसरी ओर देखें तो पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत  114 नगरों में 179 परियोजनाएं क्रियान्वित की जाने की बात प्रकाश में आयी हैं। वहीं सूत्र बतलाते हैं कि पेयजल के लिये अपूर्ण योजनओं को पूरा करने के लिए भी 322 करोड़ रूपए का प्रावधान भी रखा गया है। उक्त योजनाओं का लाभ कितना और कब मिल पायेगा यह एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है।

अनदेखी का शिकार जल स्त्रोत-


देखा जाये तो प्रदेश में सरोवरों,कुये.बाबडियों की संख्या काफी अधिक है परन्तु उनका संरक्षण नहीं होने के चलते तथा पानी माफियाओं के दखल का भी परिणाम जल संकट होना कहा जा सकता है। मध्यप्रदेश के कद्ावर मंत्री जयंत कुमार मलैया के गृह नगर दमोह की स्थिति भी कुछ इसी प्रकार कही जा सकती है। आधे दर्जन से अधिक सरोवर तथा दो दर्जन से अधिक बडे कुये,बाबडी फिर भी नगर प्यासा ? बतलादें कि यहां गत बर्ष औसत बर्षा से लगभग 20 इंच अधिक बारिश हुई थी फिर भी आज पानी के लिये जद्दोजहद करते लोग दिख जायेंगे। काफी बडा संकट क्षेत्र में पेयजल का बना हुआ है। जल एवं स्त्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर सत्तारूढ दल के नेताओं की क्या योजना है तथा संबधित विभाग के अधिकारियों द्वारा क्या भूमिका निभायी जा रही है लगातार जनता के बीच चर्चाओं के साथ विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को जन्म देती सुनी जा सकती है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नाना साहबपानसे स्मृति कार्यक्रम उचित गरिमा मिलनी चाहिए -प्रहलाद पटेल