शरीर से ज्यादा मन की सफाई आवश्यक जो भावातीत ध्यान में संभव-भुवनेश शर्मा

महर्षि महेश योगी जन्म शताब्दी समारोह में वक्ताओं ने रखे विचार

डा.एल.एन.वैष्णव

दमोह/09-04-2017 शरीर की सफाई से ज्यादा महत्वपूर्ण है मन मस्तिष्क की सफाई जो कि भावातीत ध्यान से संभव है मनुष्य प्रतिदिन कुछ मिनिट में ही यह कार्य कर सकता है यह बात महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के कुलपति भुुवनेश शर्मा ने कही। स्थानीय मानस भवन में आयोजित महर्षि महेश योगी जन्म शताब्दी समारोह के भव्य कार्यक्रम में वह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होने भावातीत ध्यान का वर्णन विस्तार से करते हुये इससे होने वाले अनेक लाभों को पूरी प्रमाणिकता से सामने रखा। श्री शर्मा ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि धर्म का मतलब प्रकृति के नियमों का पालन है और यही बात वेदों में आती है जिसको विश्व के बडे-बडे वैज्ञानिक स्वीकार करने लगे हैं। उन्होने कहा कि भारत विश्व गुरू रहा है वह अपने ज्ञान के बल पर अपना लोहा मनवाता रहा है कुछ परिस्थितियां एैसी बनी की सब कुछ गडबड हो गया। श्री शर्मा ने महर्षि महेश योगी के जन्म से लेकर शिक्षा,बैराग्य और विश्व के मानस पटल पर भारत के ज्ञान को स्थापित करने को विस्तार से रखा। उन्होने बतलाया कि 33 देशों के 250 स्वतंत्र शोध संस्थानों व विश्व विद्यालयों में 700 वैज्ञानिक अनुसंधानों ने यह प्रतिपादित किया है कि जब किसी भी स्थान या राष्ट्र की जनसंख्या के एक प्रतिशत व्यक्ति भावातीत ध्यान एक स्थान पर करते हैं तो समाज की सामूहिक चेतना में सतोगुण की वृद्धि होती है एवं नकारात्मक दूर होती है। श्री शर्मा ने कहा कि महर्षि जी ने ही प्रत्येक मानव में चेतना जागृत करने और उसे स्थायित्व देने हेतु भावातीत ध्यान की सरल ,सहज,एवं प्रयास रहित पद्धति विश्व को प्रदान की है।

वेद पाठ,स्वागत गीत,मानवंदना-

उक्त कार्यक्रम का शुभारंभ मां वीणा पाणी एवं महर्षि महेश योगी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं पुष्प अर्पित कर मंचासीन अतिथि कुलपति प्रो.भुवनेश शर्मा,पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह,जिला शिक्षा अधिकारी पी.पी.सिंह,नपा अध्यक्ष श्रीमती मालती असाटी,प्रार्चाय राजेश दीक्षित ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वहीं वेद मंत्रों का पाठ किया गया तो साथ ही विद्यालय की छात्राओं ने गुरू वंदना और स्वागत गीत की प्रस्तुति कर जमकर प्रशंसा प्राप्त की। इसी क्रम में प्राचार्य श्री दीक्षित ने मंचासीन अतिथियों की मानवंदना एवं स्वागत स्मृति चिंन्ह एवं पुष्पहारों के साथ किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों ने कलेन्डर,पुस्तक का विमोचन भी किया। इस अवसर पर महर्षि महेश योगी के जीवन पर आधारित एक डाकूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया जिसकी सराहना लोगों ने की।

किसने क्या कहा-

उक्त कार्यक्रम में प्राचार्य श्री दीक्षित ने शब्दों के माध्यम से मंचासीन अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों का स्वागत किया तो वहीं आयोजन के प्रयोजन के संबध में विस्तार से अपनी बात रखी। इसी क्रम में पुलिस अधीक्षक तिलक सिंह ने कहा कि महर्षि महेश योगी के बारे में सुना था परन्तु आज विस्तार से जानकारी प्राप्त हुई। यह उसी प्रकार की बात है जैसे कि हम माता पिता के साथ रहकर भी उतना नहीं समझ पाते जितना वह होते हैं। उनकी जानकारी जब अन्य लोग देते हैं तब पता चलता है कि हमारे माता पिता के अंदर कितने प्रकार के गुण विद्मान है ठीक वैसा ही महर्षि जी के बारे में हुआ। श्री सिंह ने कविताओं के माध्यम से अपनी बात रखते हुये कहा कि भावातीत ज्ञान का लाभ उठाना चाहिये और तनाव से मुक्त होने के साथ ही जीवन को धन्य बनाना चाहिये। इसी क्रम में जिला शिक्षा अधिकारी पी.पी.सिंह ने भावातीत ध्यान की महिमा और रामचरित मानस में आये अनेक वृतांत को विस्तार से रखा। श्रीमती असाटी ने भी अपने उद्बोधन में आयोजन की सराहना की तथा कार्यक्रम के लिये बधाई दी। कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका एवं शिक्षक आलोक सोनवलकर ने किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ संगीत शिक्षक कृष्ण कुमार चैबे ने भक्ति गीत प्रस्तुत कर जमकर तालियां बटोरी।  कार्यक्रम में बडी संख्या में छात्र-छात्राओं,अभिवावकों,गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही।

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