मैं जेलर राणा

मैं जेलर राणा  कुछ भी कर सकता हुं

प्रतिबंध के बाद भी नीली बत्ती का मोह

( डा.एल.एन.वैष्णव )

दमोह( 12-08-2017 ) भले ही नीली बत्ती को शासन ने प्रतिबंधित किया हो लेकिन कुछ अधिकारियों का मोह आज भी इससे नहीं छूट रहा है। मामला प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय का है जहां रात्रि लगभग 10 बजे बस स्टेण्ड पर मुख्य सडक पर खडे एक वाहन में लगी नीली बत्ती के बारे में जब पूंछा गया तो साहब पहले तो कुछ का कुछ जबाब देने लगे जब मामला सुलझते नहीं दिखा तो धमकी भरे अंदाज मैं जेलर राणा हुं कुछ भी कर सकता हूं । बार-बार बत्ती के बारे में पूंछने पर वह बोले यह एम्बूलेंस है जब पूंछा गया कि इसमें कहीं भी एम्बूलेंस नहीं लिखा है तो जबाब था कि लिखा है फिर कहा कि जरूरी नहीं है लिखना। किस मरीज को लेकर आये हो या छोडने गये हो तो साहब गुस्से में आते हुये कहते हैं कि जरूरी है कि क्या मरीज को बैठालना। शराब के नशे में धुत जेलर साहब एवं उनकी हरकत देखने काफी भीड भी एकत्रित हो गयी थी। कानून के जानकारों की माने तो शासन के पूर्व आदेश के तहत विभिन्न शासकीय वाहनों में पात्रता के अनुसार लाल,पीली,नीली एवं बेगनी बत्तियों को लगाने का प्रावधान था। आदेश को निरस्त पूर्व में किया जा चुका है एवं वाहनों से बत्तियों का हटावा दिया गया है। वहीं बेगनी रंग का प्रयोग एम्बूलेंस में किये जाने का प्रावधान बतलाया गया था जो कि एक आपातकालीन सेवाओं में आती है। चिकित्सा क्षेत्र के कानून के जानकारों की माने तो एम्बूलेंस में निर्धारित पूरी सुविधायें होनी चाहिये तथा उस पर एम्बूलेंस को बडे-बडे अक्षरों में लिखा भी होना चाहिये। उसका प्रयोग मरीज को लाने लेजाने के अलावा किसी अन्य कार्य में नहीं किया जा सकता।




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